राघव चड्ढा की Z+ सिक्योरिटी हटी, पंजाब की AAP सरकार का चौंकाने वाला कदम

Published : Apr 15, 2026, 02:40 PM IST
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सार

AAP बनाम राघव चड्ढा विवाद: पंजाब सरकार ने Z+ सुरक्षा हटाई, सुरक्षा स्टाफ को मुख्यालय बुलाया। राज्यसभा उपनेता पद से हटाने के बाद पार्टी में तनाव और सियासी विवाद तेज। राघव चड्ढा vs AAP अंदरूनी टकराव बढ़ा। 

Raghav Chadha Z+ Security Removal: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद के बीच पंजाब सरकार ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा हटाने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। सुरक्षा हटाए जाने के बाद उनके साथ तैनात पंजाब पुलिस के जवानों और अधिकारियों को तुरंत मुख्यालय रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

पार्टी में गिरती पकड़ या प्रशासनिक कार्रवाई?

सूत्रों का दावा है कि यह फैसला केवल सुरक्षा पुनर्मूल्यांकन नहीं बल्कि राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जुड़ा हो सकता है। हाल ही में AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से हटा दिया था, जिससे उनके और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच तनाव सार्वजनिक हो गया। इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य सरकार पर AAP का प्रभाव माना जाता है।

संसद में भूमिका पर उठे सवाल

पार्टी की ओर से चड्ढा पर यह आरोप लगाया गया था कि वे संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के बजाय “नरम PR” रणनीति अपना रहे थे। AAP नेतृत्व का कहना था कि उनकी भूमिका अपेक्षित राजनीतिक सक्रियता के अनुरूप नहीं रही। इसी के बाद उप-नेता पद से उन्हें हटाने का फैसला लिया गया था।

राघव चड्ढा का पलटवार

राघव चड्ढा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ और राजनीतिक दुष्प्रचार” बताया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य संसद में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना है, न कि अनावश्यक टकराव या हंगामा करना। चड्ढा के इस बयान ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और अधिक सार्वजनिक कर दिया।

सुरक्षा हटने के राजनीतिक मायने

Z+ सुरक्षा हटाए जाने को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय है या पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत—इस पर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग राय दे रहे हैं। हालांकि, अभी तक पंजाब सरकार या AAP की ओर से इस फैसले पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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