Published : Jan 29, 2026, 11:49 AM ISTUpdated : Jan 29, 2026, 12:05 PM IST
Ajit Pawar Last Journey Live: बारामती में अजित पवार की अंतिम यात्रा भावुक माहौल में निकली। हजारों समर्थकों ने ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारे लगाए। शरद पवार, अमित शाह समेत कई दिग्गज अंतिम संस्कार में शामिल हुए। Plane Crash की जांच जारी है।
Ajit Pawar Funeral: गुरुवार सुबह बारामती की सड़कों पर एक अलग ही माहौल था। हर तरफ़ सन्नाटा, नम आंखें और भारी मन। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अंतिम यात्रा जैसे ही शुरू हुई, पूरा शहर ठहर सा गया। हजारों समर्थक सड़कों के दोनों ओर खड़े थे। फूलों से सजा शव वाहन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा था, वैसे-वैसे “अजित दादा अमर रहें” के नारे पूरे शहर में गूंजने लगे। यह सिर्फ़ एक नेता की अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि जनता और उनके बीच बने गहरे रिश्ते की आखिरी झलक थी।
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‘अजित दादा अमर रहें’: नारों से गूंज उठा पूरा शहर
अंतिम यात्रा के दौरान बारामती का हर इलाका नारों से भर गया। युवा, बुज़ुर्ग, महिलाएं-हर कोई अपने तरीके से अजित पवार को विदाई दे रहा था। किसी की आंखों में आंसू थे, तो कोई हाथ जोड़कर अंतिम दर्शन कर रहा था। “अजित दादा अमर रहें” सिर्फ़ नारा नहीं, बल्कि समर्थकों की भावनाओं की आवाज़ थी। लोगों का कहना था कि अजित पवार ने बारामती ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र के लिए काम किया और यही वजह है कि आज जनता उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह विदा कर रही है।
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राजनीतिक गढ़ से गुजरी अंतिम यात्रा, हर मोड़ पर भीड़
अजित पवार की अंतिम यात्रा उनके राजनीतिक गढ़ बारामती के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरी। यह वही इलाक़े थे जहां उन्होंने तीन दशकों से ज़्यादा राजनीति की, चुनाव लड़े और जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई। सड़क किनारे खड़े लोग हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दे रहे थे। कई समर्थक भावुक होकर रोते दिखे। फूलों की बारिश और मौन श्रद्धांजलि के बीच शव वाहन धीरे-धीरे विद्या प्रतिष्ठान मैदान की ओर बढ़ता रहा।
इस भावुक मौके पर पवार परिवार भी अंतिम यात्रा में साथ दिखाई दिया। अजित पवार के बेटे जय पवार, भतीजे रोहित पवार और परिवार के अन्य सदस्य पूरे समय मौजूद रहे। परिवार के चेहरों पर गहरा दुख साफ झलक रहा था। समर्थक उनके प्रति भी संवेदना जता रहे थे। यह दृश्य बता रहा था कि राजनीति से परे, यह एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति भी है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
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तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर, अंतिम सम्मान
अजित पवार के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर अंतिम यात्रा निकाली गई। यह दृश्य उनके सार्वजनिक जीवन और संवैधानिक पद की गरिमा को दर्शा रहा था। जब शव वाहन विद्या प्रतिष्ठान मैदान की ओर पहुंचा, तो लोगों ने मौन रखकर अंतिम सम्मान दिया। कई समर्थकों ने फूल चढ़ाए और आखिरी बार अपने नेता को नमन किया। यह क्षण बेहद भावुक था, जहां शब्द भी कम पड़ते नजर आए।
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विद्या प्रतिष्ठान मैदान बना अंतिम विदाई का साक्षी
अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में किया गया। यह वही स्थान है जो शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। मैदान में बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर कोई अंतिम झलक पाना चाहता था। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे ताकि श्रद्धांजलि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
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बड़े नेता पहुंचे बारामती, श्रद्धांजलि का सिलसिला
अजित पवार की अंतिम यात्रा और संस्कार में कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी ने श्रद्धांजलि दी। सभी नेताओं ने अजित पवार के योगदान को याद किया और उनके परिवार को सांत्वना दी।
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समर्थकों का सैलाब: हर वर्ग की मौजूदगी
अंतिम यात्रा में सिर्फ़ राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि आम नागरिक, किसान, महिलाएं और युवा भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कई लोग दूर-दराज़ के इलाकों से बारामती पहुंचे थे। उनका कहना था कि अजित पवार ने हमेशा ज़मीनी मुद्दों पर काम किया और इसलिए जनता उन्हें कभी भूल नहीं सकती। यह भीड़ उनके जनाधार की गवाही दे रही थी।
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सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, CRPF और पुलिस तैनात
अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए थे। CRPF और स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। पुलिस और स्वयंसेवकों ने मिलकर भीड़ को नियंत्रित किया। बावजूद इसके, समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती रही, जो अजित पवार की लोकप्रियता को दर्शाता है।
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विमान दुर्घटना के बाद शोक में डूबा महाराष्ट्र
अजित पवार का निधन बारामती में हुए विमान हादसे में हुआ था, जिसमें विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई। इस खबर ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया। जैसे ही दुर्घटना की खबर सामने आई, शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों से लेकर आम जनता तक, हर किसी ने इस हादसे पर दुख जताया।
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अंतिम विदाई, लेकिन यादें हमेशा ज़िंदा रहेंगी
अजित पवार की अंतिम यात्रा समाप्त हो गई, लेकिन उनकी यादें और उनका राजनीतिक योगदान हमेशा ज़िंदा रहेगा। बारामती से लेकर पूरे महाराष्ट्र तक, लोग उन्हें एक मजबूत प्रशासक और जननेता के रूप में याद करेंगे। समर्थकों का कहना है कि “अजित दादा” भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किए गए काम और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
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