Ajit Pawar Plane Crash: न फायर ब्रिगेड, न ATC और ना...अजित दादा जेट क्रैश में 9 खतरनाक गलतियां

Published : Jan 30, 2026, 11:23 AM ISTUpdated : Jan 30, 2026, 11:43 AM IST

Ajit Pawar Plane Crash Mystery: बारामती एयरस्ट्रिप जांच में रनवे मार्कर, ATC, फायर सुविधा समेत 9 खतरनाक गलतियां सामने आईं हैं। जो VIP उड़ानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहीं है। ब्लैक बॉक्स से आखिरी 26 मिनट की जांच जारी। 

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Ajit Pawar Plane Crash Exposes Shocking Air Travel Failures: महाराष्ट्र  के डिप्टी सीएम एवं एनसीपी प्रमुख अजित पवार विमान दुर्घटना ने देश की VIP हवाई यात्रा सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बारामती एयरस्ट्रिप पर हुआ यह हादसा अब सिर्फ एक प्लेन क्रैश नहीं, बल्कि एविएशन सिस्टम की चौंकाने वाली सच्चाई बनता जा रहा है। बॉम्बार्डियर लीयरजेट 45 क्रैश जांच में सामने आई 9 बड़ी चूकें बता रही हैं कि यह दुर्घटना धीरे-धीरे तैयार हुई एक त्रासदी थी।

ब्लैक बॉक्स की जांच, कॉकपिट की आखिरी बातचीत और उड़ान के अंतिम 26 मिनट…हर कड़ी में डर, दबाव और सिस्टम की नाकामी की झलक दिखाई दे रही है। सवाल यह है-अगर इतने अनुभवी पायलट भी सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर सके, तो गलती कहां हुई?

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बारामती हवाई पट्टी पर 9 बड़ी कमियां उजागर हुईं:  

चूक 1. रनवे मार्कर नहीं: बारामती एयरस्ट्रिप कोई नियमित कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। यह मुख्य रूप से फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होती है। यहां रनवे मार्किंग तक मौजूद नहीं थी, जिससे पायलट को इंस्ट्रूमेंट-आधारित लैंडिंग का कोई सहारा नहीं मिला।

ILS और नेविगेशन सिस्टम क्यों नहीं थे?

चूक 2. इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की कमी: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एयरस्ट्रिप पर कोई इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) या आधुनिक नेविगेशनल एड्स मौजूद नहीं थे। जबकि उस समय विजिबिलिटी सिर्फ 3,000 मीटर थी, जो सुरक्षित लैंडिंग के लिए तय मानक से काफी कम है।

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आग लगने पर मदद कौन करता?

चूक 3. फायर फाइटिंग सुविधा नहीं: एयरस्ट्रिप पर कोई फायर टेंडर नहीं था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पानी से आग बुझाने की कोशिश की-जो खुद एक डरावनी सच्चाई है।

बिना ATC कैसे नियंत्रित होती है VIP फ्लाइट?

चूक 4. अनियंत्रित एयर ट्रैफिक कंट्रोल: यह एयरस्ट्रिप किसी प्रोफेशनल ATC द्वारा नहीं, बल्कि एक ट्रेनिंग अकादमी द्वारा संचालित थी।

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सुरक्षा दीवार क्यों नहीं थी?

चूक 5. चारदीवारी का अभाव: बारामती एयरस्ट्रिप पर कोई प्रोफेशनल एयर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं था। इसे एक एविएशन ट्रेनिंग अकादमी संभाल रही थी। इसके अलावा, एयरस्ट्रिप के चारों ओर चारदीवारी तक नहीं थी, जो गंभीर सुरक्षा चूक मानी जाती है।

हादसे के बाद एम्बुलेंस कहां थी?

चूक 6. आपातकालीन सहायता नदारद: हादसे के बाद सामने आया कि एयरस्ट्रिप पर कोई अग्निशमन सुविधा नहीं थी, न फायर टेंडर, न एंबुलेंस। स्थानीय लोगों ने पानी से आग बुझाने की कोशिश की। क्या VIP मूवमेंट के लिए यही तैयारी थी?

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ट्रेनिंग एयरस्ट्रिप पर VIP लैंडिंग क्यों?

चूक 7. गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल: यह एयरस्ट्रिप सिर्फ फ्लाइंग ट्रेनिंग और NSOPs के लिए थी, VIP ऑपरेशन के लिए नहीं।

हादसों की जांच विशेषज्ञ क्यों नहीं करते?

चूक 8. रेगुलेटरी और निगरानी की कमी: एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में हादसों की जांच अक्सर ब्यूरोक्रेट्स करते हैं, जबकि एक्सीडेंट एनालिसिस स्पेशलिस्ट्स की भारी कमी है। यही वजह है कि सिस्टम की असली खामियां समय पर सामने नहीं आ पातीं।

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क्या पायलट पर लैंडिंग का दबाव था?

चूक 9. ऑपरेशनल प्रेशर: जांच में यह भी सामने आया कि विमान दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश कर रहा था। कोई मेडे कॉल नहीं दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अनकंट्रोल्ड एयरस्पेस में पायलट खुद पर लैंडिंग का दबाव डाल लेते हैं, जो इस हादसे की बड़ी वजह बन सकता है।

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हादसा या सिस्टम की चूक?

टेबलटॉप एयरस्ट्रिप से महज 200 मीटर दूर हुआ यह क्रैश अजित पवार समेत पांच जिंदगियां ले गया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि VIP एविएशन, रेगुलेशन और ग्राउंड-लेवल सुरक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता का आईना है।

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