Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज में संत बनाम संत विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO आरोप और शिकायतकर्ता के गंभीर दावों के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। जानिए क्या है पूरा मामला, किसने क्या कहा और अब आगे क्या हो सकता है।
विमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष महाराज आमने-सामने, क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज में इन दिनों धार्मिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ा विवाद चर्चा में है। मामला कथित तौर पर बटुकों के साथ कुकर्म के आरोपों से जुड़ा है, जिसने दो प्रमुख संतों, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और आशुतोष महाराज को आमने-सामने ला दिया है। आरोप, जवाब, प्रत्यारोप और तीखे बयान, पूरा घटनाक्रम अब वाक्ययुद्ध में बदल चुका है।
यह मामला संवेदनशील भी है और कानूनी रूप से गंभीर भी, क्योंकि इसमें POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) कानून के तहत शिकायत दर्ज हुई है।
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कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और क्या है उनपर आरोप?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्तमान में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं और उत्तर भारत में सनातन परंपरा से जुड़े बड़े धार्मिक चेहरे माने जाते हैं। वे अक्सर गौ संरक्षण और सनातन मुद्दों पर मुखर रहते हैं।
शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि “4 लोगों ने बटुकों संग कुकर्म” किया। इसी संदर्भ में POCSO के तहत शिकायत दर्ज होने की बात कही गई है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामला अभी जांच के दायरे में है और अदालत में अंतिम फैसला आना बाकी है।
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सभी आरोपों पर सुनिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा
POCSO के आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा:
"... जो लोग आहत हुए हैं, वे अपने-अपने ढ़ंग से अपना भाव प्रकट करेंगे... अगर किसी को जानकारी है कि कुछ लोगों के साथ अन्याय हुआ है तो उन्हें महीनों से छिपाकर क्यों रखा हुआ है?..."
उन्होंने आगे गौ संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा:
“गौमाता की रक्षा का कार्यक्रम है। सनातनियों का लक्ष्य है कि गौमाता की रक्षा हो... ऐसा कैसे हो सकता है कि सनातन प्रेमी गौमाता की रक्षा पर अपनी आवाज बंद रखें?... सभी लोग हमें सहयोग कर रहे हैं।”
उनका संकेत यह था कि वे इसे एक बड़े षड्यंत्र के रूप में देख रहे हैं, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया।
इस मामले में आशुतोष महाराज ने कड़ा बयान दिया। उनका कहना है:
"अभियुक्त अपने बचाव में कहां जाएगा?... हमारे पास ऐसे पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है। कभी वे उत्तर प्रदेश पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं या कभी कह रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार जिस राज्य में है वहां से जांच करवा ली जाए... आपके खिलाफ हमने इतने सबूत इकट्ठे कर लिए हैं, इतने सबूत दे दिए हैं कि आप जो षड्यंत्र रच रहे हैं उसका अंत आ चुका है..."
उनका दावा है कि जांच एजेंसियों को पर्याप्त साक्ष्य दिए जा चुके हैं और सच सामने आएगा।
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कानूनी स्थिति क्या कहती है?
POCSO कानून बेहद सख्त है और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कठोर सजा का प्रावधान है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सजा गंभीर हो सकती है। वहीं, अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो शिकायतकर्ता पर भी कानूनी कार्रवाई संभव है।
प्रयागराज में उठे इस विवाद ने संत समाज के भीतर बड़ी दरार की चर्चा छेड़ दी है। एक ओर गंभीर आरोप हैं, दूसरी ओर तीखा बचाव और जवाबी हमले। सच्चाई क्या है, यह जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही साफ होगा।
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