ईरान सीमा के पास इजराइल का सीक्रेट बेस! जंग के बाद रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले राज

Published : Jun 05, 2026, 08:31 PM IST
azerbaijan helped israel against iran secret military base near iran border report

सार

Azerbaijan Israel Base: रिपोर्ट में अजरबैजान पर इजराइल की मदद करने को लेकर कौन-कौन से दावे किए गए हैं? ईरान की सीमा के पास कथित सैन्य और खुफिया ठिकानों का रणनीतिक महत्व क्या है? इन आरोपों पर अजरबैजान सरकार और उसके दूतावास ने क्या सफाई दी है?

Israel Secret Operations Iran: ईरान और इजराइल के बीच हालिया संघर्ष भले ही थम गया हो, लेकिन युद्ध से जुड़े नए खुलासे लगातार सामने आ रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान इजराइल ने ईरान की सीमा से महज 60 किलोमीटर दूर अजरबैजान में सैन्य और खुफिया ठिकाने बनाए थे। इन ठिकानों का इस्तेमाल कथित तौर पर ईरान के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाने, ड्रोन ऑपरेशन चलाने और विशेष सैन्य मिशनों को अंजाम देने के लिए किया गया। रिपोर्ट के सामने आने के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है, क्योंकि युद्ध के दौरान अजरबैजान ने खुद को तटस्थ (न्यूट्रल) बताया था।

रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान इजराइल ने अजरबैजान की धरती पर कई गुप्त सैन्य और खुफिया ठिकाने स्थापित किए थे। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इन ठिकानों से ईरान के भीतर गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी और कई ऑपरेशनल मिशन संचालित किए जाते थे। दावा यह भी किया गया है कि इन नेटवर्कों के जरिए ड्रोन, निगरानी उपकरण और अन्य सैन्य संसाधन ईरान के करीब पहुंचाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन अभियानों में इजराइल की विशेष सैन्य इकाइयों, हेलिकॉप्टर आधारित बलों और खुफिया एजेंसी मोसाद के कर्मियों की भी भूमिका थी।

यह भी पढ़ें: दुनिया संकट में, भारत ने कर दिखाया कमाल! 7.7% GDP ग्रोथ ने सबको चौंकाया

क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन की तैयारी थी?

रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा किया गया है। बताया गया कि इजराइल को उम्मीद थी कि ईरान के कुछ प्रमुख नेताओं की हत्या के बाद वहां व्यापक जनविरोध शुरू होगा और लोग सड़कों पर उतर आएंगे। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए कथित तौर पर अजरबैजान में अतिरिक्त सैन्य और खुफिया संसाधन तैनात किए गए थे। हालांकि, ईरान में वैसी स्थिति नहीं बनी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। देश के शीर्ष नेतृत्व पर हमलों और तनावपूर्ण हालात के बावजूद बड़े पैमाने पर जनविद्रोह नहीं हुआ।

अजरबैजान से हमले का भी दावा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अजरबैजान स्थित कथित ठिकानों से इजराइल ने ईरान के भीतर कुछ ऑपरेशन संचालित किए। दावा किया गया कि एक अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी को निशाना बनाया गया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

अजरबैजान ने किया खंडन

युद्ध के दौरान अजरबैजान सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उसकी जमीन किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी। अब रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिका स्थित अजरबैजानी दूतावास ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अजरबैजान की धरती का किसी अन्य देश के खिलाफ अभियान के लिए इस्तेमाल किए जाने संबंधी दावे निराधार हैं और उन्हें पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है।

क्यों अहम है यह मामला?

अजरबैजान और ईरान के बीच लगभग 689 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी विदेशी सैन्य शक्ति को यहां परिचालन सुविधा मिलती है, तो वह ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि इस रिपोर्ट को केवल एक सैन्य खुलासा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के शक्ति संतुलन से जुड़ा मामला माना जा रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे दावे

यह पहली बार नहीं है जब इजराइल के कथित गुप्त अभियानों को लेकर ऐसे दावे सामने आए हों। इससे पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया था कि इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने कुछ अभियानों के लिए क्षेत्रीय देशों में गुप्त नेटवर्क विकसित किए थे। हालांकि अधिकांश मामलों में संबंधित सरकारों ने आधिकारिक तौर पर ऐसे आरोपों से इनकार किया है।

ईरान-इजराइल संघर्ष से जुड़ी यह रिपोर्ट पश्चिम एशिया की जटिल भू-राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन इतना साफ है कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। खुफिया नेटवर्क, रणनीतिक साझेदारियां और गुप्त सैन्य तैयारियां अब किसी भी संघर्ष का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं जितना कि पारंपरिक युद्ध। आने वाले समय में यदि इन दावों से जुड़े और तथ्य सामने आते हैं, तो उनका असर केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की कूटनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

यह भी पढ़ें: 'यौन संबंधों से इनकार भी क्रूरता', 15 साल से अलग रह रहे दंपति को सुप्रीम कोर्ट ने दिया तलाक

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Malviya Nagar Fire Case : पीड़ितों से नहीं मिल पाई पूर्व सीएम आतिशी, हॉस्पिटल में नहीं मिली एंट्री
Khan Sir Coaching Case पर क्या बोले Pappu Yadav ? बाउंसर रखने पर भी उठा दिए सवाल