'गाय की भी होगी, बकरे की भी'...बकरीद से पहले बंगाल में हुमायूं कबीर की BJP को खुली चेतावनी

Published : May 21, 2026, 04:39 PM IST
Bakrid and Open Namaz Row Intensifies in West Bengal Amid Humayun Kabir Warning to BJP

सार

Humayun Kabir Statement: पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले कुर्बानी और सड़क पर नमाज को लेकर सियासत तेज हो गई है। हुमायूं कबीर ने भाजपा और शुभेंदु अधिकारी पर तीखा हमला बोला, जबकि राज्य सरकार ने पशु वध को लेकर सख्त नियमों का नोटिस जारी किया है।

West Bengal Bakrid Controversy: पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले कुर्बानी और खुले में नमाज को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूँ कबीर ने भाजपा नेता CM सुवेंदु अधिकारी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

उनके बयान के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भाजपा जहां इसे कानून और सार्वजनिक व्यवस्था का मामला बता रही है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम संगठनों और कुछ क्षेत्रीय दलों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं में अनावश्यक दखल नहीं होना चाहिए।

‘आग से मत खेलो’ - हुमायूं कबीर की चेतावनी

न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा कि संविधान का सम्मान जरूरी है, लेकिन धार्मिक परंपराओं का पालन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के लिए जो पशु धार्मिक रूप से मान्य हैं, उनकी कुर्बानी होगी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कुर्बानी रोकने की कोशिश की गई, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। शुभेंदु अधिकारी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “आग से मत खेलो।”

कबीर ने यह भी दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में लोग बीफ का सेवन करते हैं और सरकार को पहले लाइसेंस प्राप्त स्लॉटर हाउस पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीफ निर्यात से राजस्व कमाया जा रहा है, तो केवल धार्मिक आयोजनों पर ही विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।

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खुले में नमाज को लेकर भी बढ़ा विवाद

हुमायूं कबीर ने कहा कि ईद की नमाज के लिए प्रशासन को पर्याप्त बड़े मैदान उपलब्ध कराने चाहिए। उनका तर्क था कि अगर पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी, तो लोग सड़कों पर नमाज पढ़ने को मजबूर होंगे। दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि उनका विरोध किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और “तुष्टीकरण की राजनीति” से है। भाजपा का तर्क है कि कई इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज की अनुमति सीमित है, इसलिए इस मुद्दे को धार्मिक भेदभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार का सख्त आदेश

इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद से पहले एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर गाय और भैंस की हत्या को लेकर नियमों को दोहराया है। सरकार ने साफ कहा है कि फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना किसी गाय, बैल, बछड़े या भैंस की हत्या नहीं की जा सकती। नोटिस के अनुसार-

  • प्रमाण पत्र पर दो अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर जरूरी होंगे।
  • बिना अनुमति पशु वध को अपराध माना जाएगा।
  • उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

सरकार के इस आदेश को प्रशासनिक सख्ती और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

चुनावी राजनीति के केंद्र में धार्मिक मुद्दे

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे लगातार चुनावी विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। बकरीद, रामनवमी, दुर्गा विसर्जन और सड़क पर धार्मिक आयोजनों जैसे मुद्दों पर पहले भी राज्य में विवाद देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा और क्षेत्रीय दल दोनों अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में कुर्बानी और खुले में नमाज जैसे मुद्दों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। फिलहाल राज्य प्रशासन की नजर संवेदनशील इलाकों पर बनी हुई है और त्योहार के दौरान शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की जा रही है।

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