
हैदराबाद: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न और POCSO (पॉक्सो) एक्ट के गंभीर आरोपों में घिरे भगीरथ ने आखिरकार कानूनी शिकंजे के आगे घुटने टेक दिए हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा (गिरफ्तारी पर रोक) की अर्जी खारिज होने के बाद भगीरथ को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने न केवल तेलंगाना की सियासत में उबाल ला दिया है, बल्कि केंद्रीय कैबिनेट तक इसकी गूंज पहुंच गई है।
8 मई को मामला दर्ज होने के बाद से ही भगीरथ पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहे थे। साइबराबाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनके खिलाफ एक 'लुकआउट सर्कुलर' जारी किया था। पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) और अन्य विशेष टीमें दिल्ली, करीमनगर और देश के विभिन्न हिस्सों में भगीरथ के हर संभावित ठिकाने और जान-पहचान वालों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही थीं।
शनिवार आधी रात के बाद पुलिस को एक बेहद पुख्ता और गोपनीय जानकारी मिली कि आरोपी भगीरथ शहर की पुलिस अकादमी के पास देखा गया है। बिना कोई वक्त गंवाए, पुलिस ने मंचिरेवुला और नारसिंगी पुलिस सीमा के भीतर चारों तरफ घेराबंदी (नाकाबंदी) कर दी। इस चक्रव्यूह को भांपते हुए और अपने वकीलों की सलाह पर, आखिरकार भगीरथ ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
गिरफ्तारी के बाद भगीरथ को तुरंत पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया। कानून की सख्त प्रक्रियाओं का पालन करते हुए, जांच अधिकारी ने निष्पक्ष नागरिकों यानी 'पंच गवाहों' की मौजूदगी में भगीरथ से कड़ी पूछताछ की। पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। रात में ही मेडिकल टेस्ट कराने के बाद भगीरथ को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
इस पूरे मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू है। भगीरथ और उनके पिता केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। भगीरथ ने पुलिस में एक जवाबी शिकायत (काउंटर FIR) दर्ज कराई है, जिसमें कहानी पूरी तरह से अलग नजर आती है:
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय ने इस पूरे मामले को अपनी साख खराब करने की एक 'राजनीतिक साजिश' करार दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि कानून का सम्मान करते हुए उन्होंने खुद अपने बेटे को जांच में सहयोग करने और सरेंडर करने को कहा था।
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शनिवार को 17 वर्षीय पीड़िता और उसकी मां (शिकायतकर्ता) के बयान मजिस्ट्रेट के सामने (धारा 164 के तहत) दर्ज कराए गए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान बेहद विश्वसनीय माने जाते हैं और मुकदमे के दौरान गवाह इनसे मुकर नहीं सकते। पीड़िता के बयानों के आधार पर ही पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट की और भी ज्यादा सख्त और गैर-जमानती धाराएं जोड़ दीं, जिसने भगीरथ के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल हाई-प्रोफाइल चेहरों को देखते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। पहले इस जांच की निगरानी IPS अधिकारी रितुराज कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद अब इस पूरे संवेदनशील मामले की कमान एक महिला अधिकारी को सौंप दी गई है, ताकि पीड़िता को पूरी तरह से सुरक्षित माहौल मिल सके और जांच निष्पक्ष हो।
इस गिरफ्तारी के बाद तेलंगाना की सियासत में भूचाल आ गया है। तेलंगाना रक्षा सेना (TRS) की अध्यक्ष के. कविता ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बंदी संजय कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल (MoS गृह) से तुरंत हटाने की मांग की है। कविता का तर्क है कि जब तक केंद्रीय मंत्री अपने पद पर रहेंगे, तब तक उनके बेटे के खिलाफ एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होना मुमकिन नहीं है। अब सबकी नजरें अदालत पर टिकी हैं कि क्या भगीरथ को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा या उनकी काउंटर थ्योरी उन्हें इस दलदल से बाहर निकाल पाएगी।
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