Hindu Leader Shot Dead: बांग्लादेश के जेसोर में हिंदू नेता राणा प्रताप बैरागी की 7 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। 3 लाख टका सुरक्षा टैक्स देने के बावजूद जान नहीं बची। 18 दिनों में 6 हत्याओं से अल्पसंख्यकों में दहशत है।
Bangladesh Violence Against Hindus: बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जेसोर जिले में एक हिंदू नेता और पत्रकार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या ने पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा के नाम पर लाखों टका देने के बाद भी किसी की जान नहीं बच पा रही, तो आम हिंदू परिवार कितना सुरक्षित है?
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कौन थे राणा प्रताप बैरागी और क्यों बने निशाना?
37 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी जेसोर जिले में एक आइस फैक्ट्री चलाते थे। इसके साथ ही वे पत्रकारिता से भी जुड़े थे और हिंदू अल्पसंख्यकों के मुद्दों को खुलकर उठाते थे। स्थानीय लोग उन्हें एक निर्भीक हिंदू नेता के रूप में जानते थे। परिवार के मुताबिक, राणा प्रताप पिछले कई महीनों से कट्टरपंथी समूहों को करीब 3 लाख टका ‘सुरक्षा टैक्स’ दे चुके थे, ताकि उनके परिवार और व्यवसाय को नुकसान न पहुंचे।
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फैक्ट्री के बाहर बुलाकर 7 गोलियां… क्या यह सोची-समझी साज़िश थी?
परिजनों के अनुसार, राणा प्रताप को उनकी आइस फैक्ट्री के पास बुलाया गया और वहीं उन पर सात गोलियां दाग दी गईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित हत्या मानी जा रही है। रिश्तेदारों का कहना है कि मकसद साफ था-एक ऐसे हिंदू नेता को खत्म करना जो आवाज उठाने की हिम्मत रखता था।
क्या ‘प्रोटेक्शन टैक्स’ अब जबरन वसूली का नया हथियार बन गया है?
ग्रामीणों का कहना है कि जेसोर और आसपास के इलाकों में कट्टरपंथी गिरोह हिंदू घरों में जाकर हर महीने पैसे मांगते हैं। पैसे न देने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। हालांकि ये लोग खुद को किसी खास राजनीतिक दल से जोड़ते हैं या नहीं, यह साफ नहीं है, लेकिन दहशत का माहौल इतना गहरा है कि कोई खुलकर शिकायत तक नहीं करता।
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18 दिनों में 7 हत्याएं: क्या हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं?
पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में 7 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। राणा प्रताप की हत्या के कुछ घंटों बाद ही एक और हिंदू व्यक्ति मणि चक्रवर्ती को पीट-पीटकर मार डाला गया। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असहाय महसूस कर रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। कई इलाकों में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है और इसका सबसे ज्यादा असर हिंदू अल्पसंख्यकों पर पड़ा है।
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क्या हिंदू परिवार अब पलायन को मजबूर हैं?
डर के माहौल में कई हिंदू परिवार भारत जाने की योजना बना रहे हैं। कुछ लोग वीज़ा अप्लाई करने की तैयारी में हैं, तो कुछ अपनी ज़मीन बेचकर भारत के रिश्तेदारों के पास जाने की सोच रहे हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “यहाँ रहना अब सुरक्षित नहीं लगता, पता नहीं अगला नंबर किसका हो।” राणा प्रताप बैरागी की हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की बिगड़ती हालत की भयावह तस्वीर है। जब आवाज उठाने वालों को इस तरह खामोश कर दिया जाता है।
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