चोरी का शक, भीड़ का पीछा और नहर में छलांग-बांग्लादेश में एक और हिंदू की मौत-सच क्या है?
Bangladesh Hindu Death Mystery: चोरी के शक में पीछा करती भीड़ से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार नहर में कूद गया और वहीं उसकी मौत हो गई। क्या वह वाकई चोर था या सिर्फ शक की बलि चढ़ा? बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

Bangladesh Hindu Attacks: बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला नौगाँव ज़िले के महादेवपुर इलाके से सामने आया है, जहां चोरी के शक में भीड़ द्वारा पीछा किए जाने के बाद एक 25 वर्षीय हिंदू युवक की नहर में डूबने से मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ इंसानियत को झकझोरने वाली है, बल्कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। मृतक की पहचान भंडारपुर गांव निवासी मिथुन सरकार के रूप में हुई है। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने मंगलवार दोपहर को नहर से उसका शव बरामद किया।
चोरी का शक कैसे एक युवक की मौत की वजह बन गया?
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिथुन सरकार पर कुछ लोगों को चोरी का शक हुआ। बिना किसी पुख्ता सबूत या पुलिस को सूचना दिए, स्थानीय लोगों के एक समूह ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। भीड़ से डरकर मिथुन भागने लगा और इसी दौरान उसने जान बचाने के लिए पास की एक नहर में छलांग लगा दी। दुर्भाग्यवश, वह तैर नहीं पाया और डूब गया।
क्या मिथुन सरकार सच में चोरी में शामिल था?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या मिथुन सरकार वाकई चोरी में शामिल था? अब तक पुलिस या प्रशासन की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यानी, यह पूरी घटना सिर्फ शक के आधार पर हुई, जिसने एक युवक की जान ले ली। यह भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने का एक और खौफनाक उदाहरण माना जा रहा है।
क्या यह मॉब जस्टिस का नया मामला है?
इस घटना ने एक बार फिर “मॉब जस्टिस” यानी भीड़ द्वारा सजा देने की मानसिकता को उजागर कर दिया है। जब आम लोग खुद ही जज, जूरी और जल्लाद बन जाते हैं, तो नतीजा अक्सर निर्दोषों की मौत के रूप में सामने आता है। मिथुन सरकार की मौत भी इसी मानसिकता की ओर इशारा करती है।
#BREAKING: Yet Another Hindu Killed in Bangladesh. Minority Hindu Youth dies in Bangladesh by jumping into a canal after being chased by a mob. In Mahadebpur of Naogaon, a young man named Mithun Sarkar (25) died after drowning while being chased by locals on suspicion of theft. pic.twitter.com/leXEFgPvCf
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 6, 2026
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले क्यों बढ़ रहे हैं?
मिथुन की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाली कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं।
- जेसोर ज़िला: एक हिंदू व्यवसायी और अखबार के कार्यकारी संपादक की गोली मारकर हत्या।
- नरसिंगडी: 40 साल के हिंदू किराना दुकानदार की धारदार हथियार से हत्या।
- 3 जनवरी: 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास की आग लगाकर हत्या।
- 24 दिसंबर: राजबाड़ी में अमृत मंडल को पीट-पीटकर मार डाला गया।
- 18 दिसंबर: दीपू चंद्र दास को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीटा और शव जला दिया।
ये घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं—क्या बांग्लादेश में भीड़ का कानून हावी हो रहा है?
क्या चुनावी माहौल में बढ़ रही है हिंसा?
ये सभी घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब बांग्लादेश 2024 के विद्रोह के बाद अपने पहले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद राजनीतिक अस्थिरता और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मिथुन सरकार की मौत की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी? या यह मामला भी बाकी घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, यह घटना बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक गहरा सवाल छोड़ गई है।

