
India Health Alert Measles: बांग्लादेश इस समय खसरे के एक भीषण और तेजी से फैलते प्रकोप से जूझ रहा है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं। यह स्थिति केवल एक देश तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके सीमा पार फैलने की आशंका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को भी सतर्क कर दिया है।
WHO ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि खसरा जैसे अत्यधिक संक्रामक वायरस के फैलने का खतरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है। संगठन ने दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को विशेष रूप से जोखिमपूर्ण बताया है, जहां यह बीमारी पहले से स्थानिक रूप में मौजूद है। विशेष चिंता इस बात की है कि बांग्लादेश और भारत की खुली और सक्रिय सीमा, साथ ही बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही, संक्रमण के प्रसार को आसान बना सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के 64 में से 58 जिले इस प्रकोप की चपेट में आ चुके हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र ढाका, चट्टोग्राम, सिलहट और कॉक्स बाजार जैसे घनी आबादी वाले शहर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 91% से अधिक मामले 1 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों में पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्रकोप मुख्य रूप से बाल स्वास्थ्य संकट में बदल चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गंभीर स्थिति की जड़ पिछले कुछ वर्षों में टीकाकरण अभियान में आई गिरावट है। राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक बाधाओं के कारण नियमित टीकाकरण अभियान बाधित हुआ, जिससे खसरे के खिलाफ प्रतिरक्षा कमजोर पड़ गई। 2025 तक टीकाकरण दर में गिरावट के कारण कई क्षेत्रों में केवल 60% के आसपास ही कवरेज रह गया, जो WHO के 95% सुरक्षा मानक से काफी कम है।
हालांकि WHO ने भारत को संभावित जोखिम वाले देशों में रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है। भारत में खसरा-रूबेला टीकाकरण कवरेज 90% से अधिक बताया जा रहा है, जिससे व्यापक स्तर पर हर्ड इम्युनिटी बनी हुई है। वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट डॉ. जैकब जॉन के अनुसार, “भारत में राष्ट्रीय स्तर पर बड़े प्रकोप की संभावना बेहद कम है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में छिटपुट मामले सामने आ सकते हैं।”
खसरा दुनिया के सबसे संक्रामक वायरल रोगों में से एक है। इसका R0 (रिप्रोडक्टिव रेट) 12 से 18 के बीच माना जाता है, यानी एक संक्रमित व्यक्ति 30 तक अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। यह बीमारी तेज बुखार, खांसी, लाल आंखें और शरीर पर दाने जैसे लक्षणों से शुरू होती है, लेकिन गंभीर मामलों में निमोनिया, मस्तिष्क संक्रमण और मौत तक हो सकती है।
भारत ने यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत व्यापक टीकाकरण व्यवस्था लागू की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से देश में बड़ी महामारी की संभावना फिलहाल सीमित है। हालांकि WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी और सतर्कता बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं, खासकर सीमावर्ती राज्यों में।
जहां एक ओर भारत मजबूत टीकाकरण कवरेज के कारण सुरक्षित स्थिति में नजर आ रहा है, वहीं बांग्लादेश में बढ़ता प्रकोप पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी बन चुका है। WHO की चेतावनी साफ संकेत देती है कि संक्रामक बीमारियों की सीमाएं नहीं होतीं, और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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