BAPS News: प्रमुखस्वामी महाराज की जीवनी ने बनाया Guinness World Record

Published : Oct 05, 2026, 06:52 PM IST
Pramukh Swami Maharaj biography guinness world record

सार

BAPS प्रमुखस्वामी महाराज की 13 खंडों वाली जीवनी को एकल लेखक की दुनिया की सबसे लंबी जीवनी के रूप में Guinness World Record में दर्ज किया गया।

नई दिल्ली/लंदन। BAPS स्वामीनारायण संस्था के दिवंगत आध्यात्मिक प्रमुख परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज के जीवन पर आधारित 13 खंडों का विस्तृत जीवनचरित्र अब गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। इस कृति को एकल लेखक द्वारा लिखे गए दुनिया के सबसे लंबे जीवनचरित्र के रूप में मान्यता मिली है।

‘ब्रह्मस्वरूप प्रमुखस्वामी महाराज: विस्तृत जीवन एवं कार्य’ नाम से प्रकाशित इस जीवनचरित्र में कुल 8,848 पृष्ठ और 21,46,447 शब्द हैं। संस्कृत विद्वान साधु आदर्शजीवनदास, पीएच.डी. ने इसे लिखा है। इसमें प्रमुखस्वामी महाराज के 94 वर्षों के जीवन, उनके आध्यात्मिक नेतृत्व और समाज के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से दस्तावेजीकरण किया गया है।

Guinness World Record का प्रमाणपत्र महंत स्वामी महाराज को सौंपा गया

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का आधिकारिक प्रमाणपत्र 4 अक्टूबर 2026 को लंदन के OVO एरीना वेम्बली में आयोजित कार्यक्रम में परम पूज्य महंत स्वामी महाराज को प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम उनकी 93वीं जयंती के अवसर पर हुआ। इस ऐतिहासिक मौके के प्रत्यक्ष गवाह एरीना में मौजूद करीब 11,000 लोग बने। वहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद दसियों हजार लोगों ने कार्यक्रम को लाइव वेबकास्ट के जरिए देखा।

प्रमाणपत्र गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के वरिष्ठ निर्णायक कार्ल सैविल ने प्रदान किया। उन्होंने कहा कि एकल लेखक द्वारा लिखे गए सबसे लंबे जीवनचरित्र के लिए प्रमाणपत्र देना उनके लिए खुशी और सम्मान की बात है। उन्होंने इस उपलब्धि को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के उस उद्देश्य से भी जोड़ा, जिसके तहत दुनिया की असाधारण और अनूठी उपलब्धियों को दर्ज किया जाता है।

13 खंडों में दर्ज है प्रमुखस्वामी महाराज का 94 साल का जीवन

यह जीवनचरित्र सिर्फ लंबाई और पृष्ठ संख्या के कारण खास नहीं है। इसमें प्रमुखस्वामी महाराज के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को विस्तार से दर्ज किया गया है। कृति में उनके आध्यात्मिक नेतृत्व, विनम्रता, भक्ति और निःस्वार्थ सेवा को प्रमुखता से सामने रखा गया है। इसके साथ ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों और समुदायों के लिए किए गए उनके कार्यों और उनके जीवन से प्रेरित सामाजिक-आध्यात्मिक गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है। इस जीवनचरित्र का शोध और लेखन जुलाई 2017 से अगस्त 2020 के बीच 38 महीनों में पूरा किया गया। यानी प्रमुखस्वामी महाराज के निधन के बाद इस विशाल परियोजना को पूरा करने में तीन साल से अधिक का समय लगा।

साधु आदर्शजीवनदास ने कहा- विषय लेखक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण

जीवनचरित्र के लेखक साधु आदर्शजीवनदास ने कहा कि इस कृति का विषय उसके लेखक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, प्रमुखस्वामी महाराज का जीवन गहरी आध्यात्मिकता, विनम्रता और वैश्विक सद्भाव, करुणा तथा सहानुभूति के प्रति समर्पण से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि प्रमुखस्वामी महाराज के जीवन और उनकी स्थायी विरासत को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही।

3.10 लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं

प्रमुखस्वामी महाराज का यह जीवनचरित्र अपने आकार के साथ-साथ पाठकों तक पहुंच के मामले में भी उल्लेखनीय है। अब तक इसके 3,10,000 से अधिक सेट/प्रतियां बिक चुकी हैं। BAPS के लिए यह कृति आध्यात्मिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखी जा रही है। इसका उद्देश्य प्रमुखस्वामी महाराज के जीवन, विचारों और कार्यों को वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखना है।

BAPS के नाम एक और Guinness World Record

प्रमुखस्वामी महाराज की जीवनी को मिली यह मान्यता BAPS की गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दूसरी बड़ी उपलब्धि के बाद आई है। फरवरी 2026 में गुजरात के वडोदरा में 12,723 बच्चों ने एक साथ संस्कृत में सत्संग दीक्षा के श्लोकों का पाठ किया था। इस आयोजन के जरिए ‘एक साथ सर्वाधिक लोगों द्वारा हिंदू ग्रंथ-पाठ’ का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इस व्यापक पहल में 15,000 से ज्यादा बच्चों ने सभी 315 संस्कृत श्लोक कंठस्थ किए थे।

कौन हैं साधु आदर्शजीवनदास?

साधु आदर्शजीवनदास, पीएच.डी., संस्कृत के विद्वान, लेखक और BAPS स्वामी हैं। उन्होंने शुरुआत में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद संस्कृत में उच्च शिक्षा हासिल की और दो डॉक्टरेट डिग्रियां प्राप्त कीं। वे अब तक 17 पुस्तकों के लेखक रहे हैं और 8 अन्य पुस्तकों के सह-लेखक हैं। इसके अलावा उन्होंने 300 से अधिक बड़े स्तर के नाटकों की रचना भी की है।

प्रमुखस्वामी महाराज का जीवन और BAPS की वैश्विक विरासत

परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज (1921–2016) भगवान स्वामीनारायण के पांचवें आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे। वे दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा के स्रोत रहे। उनके जीवन का प्रमुख संदेश था- “दूसरों की प्रसन्नता में ही हमारी प्रसन्नता है।” उन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा, उनके कल्याण और उन्हें सकारात्मक मूल्यों के लिए प्रेरित करने में लगाया।

प्रमुखस्वामी महाराज ने दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा की और विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच प्रेम, शांति, सद्भाव, सदाचार और ईश्वर में आस्था जैसे मूल्यों का संदेश दिया। उनके नेतृत्व में BAPS स्वामीनारायण संस्था ने एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक और मानवीय संगठन का स्वरूप लिया। BAPS के अनुसार, संस्था से दुनिया भर में 10 लाख से अधिक सदस्य, 80,000 स्वयंसेवक और 5,025 केंद्र जुड़े हुए हैं। प्रमुखस्वामी महाराज को उनके अनुयायी और उन्हें जानने वाले लोग एक ऐसे आध्यात्मिक नेता के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने सेवा, करुणा और मानव कल्याण को अपने जीवन का केंद्र बनाया।

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