रोड लाइट ढोकर पढ़ाई, फिर 64% अंक, आजादी के बाद पहली बार इस गांव में फर्स्ट डिविजन!

Published : Apr 24, 2026, 03:40 PM IST
Barabanki Student Karna Kumar Makes History as First Ever First Division Pass from Village After Independence

सार

Barabanki Karna Kumar Success Story: बाराबंकी के निजामपुर गांव में आजादी के बाद पहली बार करन कुमार ने हाईस्कूल में फर्स्ट डिविजन हासिल किया। शादियों में रोड लाइट ढोने और मजदूरी करने के बावजूद 64% अंक लाकर उन्होंने गांव के लिए इतिहास रच दिया।

बाराबंकी जिले के बनीकोडर ब्लॉक का निजामपुर (अहमदपुर) गांव आज एक ऐतिहासिक पल का गवाह बन गया है। आजादी के सात दशक बाद पहली बार इस गांव से कोई छात्र फर्स्ट डिविजन में हाईस्कूल पास हुआ है। यह उपलब्धि हासिल की है करन कुमार ने, जिन्होंने 64 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास कर पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। यह सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी है जहां अभावों के बीच भी सपनों ने हार नहीं मानी। करन की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है और उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखी।

शादियों में रोड लाइट ढोकर चलता रहा पढ़ाई का सफर

करन कुमार का बचपन किसी सुविधा या आराम के साथ नहीं बीता। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बहुत कम उम्र से ही काम करना पड़ा। शादियों के सीजन में वे टेंट हाउस में काम करते थे और रोड लाइट सिर पर ढोने का काम करते थे। यही नहीं, परिवार की मदद के लिए वे मजदूरी भी करते थे और जब काम नहीं मिलता था, तब साइकिल रिक्शा चलाकर अपना खर्च निकालते थे। इन सबके बीच उन्होंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। घर में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं थी, लेकिन करन ने अंधेरे को अपनी मेहनत पर हावी नहीं होने दिया।

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आजादी के बाद पहली बार गांव को मिला फर्स्ट डिविजन छात्र

निजामपुर (अहमदपुर) गांव के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक है। ग्रामीणों के अनुसार, आजादी के बाद पहली बार यहां से किसी छात्र ने हाईस्कूल में फर्स्ट डिविजन हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल करन की नहीं, बल्कि पूरे गांव की सोच बदलने वाली घटना बन गई है। वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े इस गांव में अब उम्मीद की एक नई किरण जगी है। गांव के लोग इसे एक “टर्निंग पॉइंट” मान रहे हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेंगी।

मौसेरे भाई की सफलता ने दी प्रेरणा

करन कुमार की सफलता के पीछे एक बड़ी प्रेरणा उनके मौसेरे भाई रामकेवल (रामसेवक) हैं। पिछले वर्ष रामकेवल ने भी हाईस्कूल पास कर गांव में इतिहास रचा था। उसी सफलता को देखकर करन ने ठान लिया कि वह भी पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे। दोनों भाइयों की मेहनत ने अब गांव के माहौल को बदलना शुरू कर दिया है। रामकेवल ने भी करन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि अब गांव के अन्य बच्चे भी पढ़ाई के प्रति गंभीर हो रहे हैं।

कठिन हालात में भी नहीं डगमगाया हौसला

करन कुमार की कहानी यह दिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो रास्ता खुद बन जाता है। दिन में मजदूरी, शादी समारोह में काम और रात में पढ़ाई, यह दिनचर्या उनके जीवन का हिस्सा रही। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके शिक्षकों के अनुसार, करन हमेशा मेहनती और अनुशासित छात्र रहे हैं, जो हर परिस्थिति में पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे।

अब सपना पुलिस विभाग में सेवा का

हाईस्कूल में फर्स्ट डिविजन के साथ सफलता हासिल करने के बाद करन का सपना अब और बड़ा हो गया है। वह आगे चलकर पुलिस विभाग में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जो संघर्ष देखा है, वह उन्हें समाज के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देता है।

गांव के लिए बनी प्रेरणा की कहानी

करन कुमार की सफलता अब पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई है। जहां पहले शिक्षा को लेकर सीमित जागरूकता थी, अब वहां बच्चे और अभिभावक पढ़ाई के महत्व को समझने लगे हैं। निजामपुर (अहमदपुर) गांव की यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है, एक ऐसा बदलाव जो संघर्ष से निकली उम्मीदों को नई दिशा देता है।

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