रंगीली गली में चली लाठियां! 5 Photos में देखें बरसाना की लठामार होली 2026

Published : Feb 26, 2026, 11:12 AM IST

Barsana Lathmar Holi 2026: बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली 2026 के दौरान रंगोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। नंदगांव के हुरियारों पर बरसाने की हुरियारिनों ने प्रेम की लाठियां बरसाईं। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी हुई।

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बरसाना में बरसा प्रेम का रंग

राधा रानी की नगरी बरसाना बुधवार को सचमुच रंगों के समंदर में डूबी नजर आई। शाम करीब पांच बजे जब विश्व प्रसिद्ध लठामार होली शुरू हुई, तो पूरा इलाका “राधे-राधे” के जयकारों से गूंज उठा। छतों से लेकर गलियों तक सिर्फ अबीर-गुलाल ही नजर आ रहा था। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु इस अनोखे रंगोत्सव के साक्षी बने।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘रंगोत्सव 2026’ को इस बार और भव्य रूप दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, बेहतर सुरक्षा और खास व्यवस्थाओं के बीच बरसाना ने एक बार फिर दुनिया को अपनी अनूठी परंपरा दिखाई।

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प्रिया कुंड पर दामाद सा स्वागत, फिर श्रीजी से ली आज्ञा

नंदगांव से जब हुरियारे बरसाना पहुंचे तो सबसे पहले प्रिया कुंड पर उनका भव्य स्वागत हुआ। बरसाना के लोग कृष्ण के सखाओं को अपना दामाद मानते हैं, इसलिए उनका सत्कार भी उसी आत्मीयता से किया जाता है। मिठाई, पकोड़े, ठंडाई और भांग के साथ मेहमाननवाजी की गई।

इसके बाद हुरियारों ने पगड़ी बांधी और ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित श्री लाडली किशोरी जी मंदिर पहुंचकर राधा रानी से होली खेलने की अनुमति ली। इस दौरान हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई। आसमान से बरसते फूलों ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया।

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रंगीली गली में गूंजे रसिया, 5000 साल पुरानी परंपरा

दोपहर बाद करीब चार बजे हुरियारे रंगीली गली पहुंचे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर ब्रज के पारंपरिक रसिया और होली गीत गाए गए। हुरियारों ने गीतों के जरिए हुरियारिनों को रिझाने की कोशिश की।

इसके जवाब में महिलाओं ने हंसी-ठिठोली के बीच लाठियां बरसाईं। पुरुषों ने चमड़े की मजबूत ढाल से अपना बचाव किया। देखने वालों के लिए यह दृश्य रोमांच और आस्था का अद्भुत संगम था।

मान्यता है कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। जब भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी को चिढ़ाने बरसाना आए थे, तब सखियों ने उन्हें लाठियों से खदेड़ा था। उसी घटना की याद में आज भी यह लठामार होली खेली जाती है। ब्रज में होली बसंत पंचमी से शुरू होकर करीब 45 दिनों तक चलती है और उसका सबसे बड़ा आकर्षण यही लठामार होली होती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहा। श्रद्धालु भारती ने कहा कि उन्होंने पहली बार ऐसी होली देखी है, जहां लाठियों की मार में भी प्रेम और भक्ति साफ महसूस होती है। उन्हें लगा जैसे खुद कान्हा इस उत्सव में मौजूद हों।

स्वाति नाम की एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद व्यवस्था बेहतरीन रही। प्रशासन हर जगह मुस्तैद दिखा। हेलीकॉप्टर से फूल बरसने का पल उनके लिए सबसे खास रहा।

नंदबाबा मंदिर के मुख्य पुजारी मनीष गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव और बरसाना का रिश्ता द्वापर युग से जुड़ा है। यह लाठियां चोट पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम और मनुहार का प्रतीक हैं। पूरा ब्रज इस समय प्रेम रस में डूबा हुआ है।

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4500 जवानों के साथ अभेद्य सुरक्षा

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। 4500 से ज्यादा पुलिसकर्मी, पीएसी और एंटी रोमियो स्क्वायड की टीमें हर चौराहे और गली में तैनात रहीं।

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार खुद पैदल गलियों में घूमकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल और मेडिकल सुविधाओं को लेकर खास तैयारी की गई थी। इसी का नतीजा रहा कि इतना बड़ा आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

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क्यों खास है बरसाना की लठामार होली?

बरसाना की लठामार होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रेम का जीवंत रूप है। यहां रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं, बल्कि दिलों पर भी चढ़ता है।

हर साल की तरह इस बार भी बरसाना ने साबित कर दिया कि ब्रज की होली सिर्फ खेली नहीं जाती, बल्कि जी जाती है। लाखों लोगों की मौजूदगी में जब राधा-कृष्ण के जयकारे गूंजते हैं, तो लगता है जैसे इतिहास फिर से जिंदा हो उठा हो।

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