वेस्ट लंदन में भारतीय युवक गुरबेज सिंह की चाकू मारकर हत्या-कौन था असली हमलावर? Southall के नॉर्थ रोड पर रात 12:30 बजे हुआ हमला अचानक क्यों हुआ? CCTV व गवाहों के बावजूद क्या पुलिस सच्चाई तक पहुंच पाएगी या केस उलझा रहेगा? क्या यह सिर्फ हत्या है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश और छिपा हुआ सच है?

लंदन/नई दिल्ली: सात समंदर पार सुनहरे भविष्य का सपना लेकर गए एक और भारतीय नौजवान की जिंदगी का दीया बेरहमी से बुझा दिया गया। वेस्ट लंदन के साउथॉल इलाके से एक ऐसी खौफनाक खबर आई है, जिसने न सिर्फ ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को सहमा दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 26 साल के भारतीय मूल के युवक गुरबेज सिंह पर बीच सड़क कुल्हाड़ी या चाकू से ऐसा जानलेवा हमला हुआ कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस इस खूनी खेल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, लेकिन कई परेशान करने वाले सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं।

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आधी रात का वो खौफनाक मंजर: दुकान के बाहर अचानक तड़प उठा युवक

यह खौफनाक वारदात बुधवार तड़के की है, जब पूरा लंदन सो रहा था। साउथॉल में डॉर्मर्स वेल्स लेन के जंक्शन के पास स्थित नॉर्थ रोड पर अचानक चीख-पुकार मच गई। रात के करीब 12:30 बजे, जब 26 वर्षीय गुरबेज सिंह एक दुकान के बाहर खड़े थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

हमला इतना अचानक और बेरहम था कि गुरबेज को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उन्हें बचाने आए 30 साल के एक अन्य शख्स को भी हमलावरों ने नहीं बख्शा और उसे भी घायल कर दिया। खून से लथपथ गुरबेज सड़क पर तड़प रहे थे। सूचना मिलते ही लंदन एम्बुलेंस सर्विस और मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पैरामेडिक्स ने गुरबेज की उखड़ती सांसों को थामने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि उन्हें घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया।

7 गिरफ्तारियां और 6 की रिहाई: आखिर कौन है वो 'सातवां' चेहरे के पीछे का राज?

इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लंदन पुलिस के स्पेशलिस्ट क्राइम कमांड ने मोर्चा संभाला। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तफ्तीश तेज की और आनन-फानन में घटनास्थल और उसके आसपास से सात संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र 20 से 30 साल के बीच थी। कूटनीतिक और कानूनी गलियारों में लगा कि मामला सुलझ गया है, लेकिन सस्पेंस तब और गहरा गया जब लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने सात में से छह लोगों को बिना किसी कार्रवाई के रिहा कर दिया।

अब पुलिस की हिरासत में सिर्फ सातवां शख्स बचा है, जिसे फिलहाल जमानत पर रिहा किया गया है और जांच पूरी होने तक नजर रखने को कहा गया है। सवाल उठता है कि अगर छह लोग बेकसूर थे, तो क्या वह सातवां शख्स ही इस कत्ल का मास्टरमाइंड है? या फिर असली कातिल अभी भी पुलिस की पहुंच से दूर खुले आसमान में घूम रहा है?

'कातिल की तलाश': जासूसों की हर आंख CCTV और गवाहों पर टिकी

मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर एलिसन फॉक्सवेल इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए दिन-रात एक कर रही हैं। उन्होंने गुरबेज के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए जनता से मदद की गुहार लगाई है।

फॉक्सवेल ने कहा, "हमारा मानना है कि यह हमला नॉर्थ रोड और डॉर्मर्स वेल्स लेन के जंक्शन पर हुआ था। मैं उस इलाके के हर नागरिक, दुकानदार या राहगीर से अपील करती हूं कि जिसके पास भी उस वक्त का कोई सीसीटीवी फुटेज, डैशकैम रिकॉर्डिंग हो या जिसने उस रात कुछ भी संदिग्ध देखा हो, वह तुरंत आगे आए।" पुलिस के खोजी दस्ते अब उस इलाके के डिजिटल फुटप्रिंट्स और गवाहों के बयानों की कड़ियों को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कत्ल की असली वजह (Motive) का पता लगाया जा सके।

क्या 'नस्लीय नफरत' बनी काल? ब्रिटेन में सुलगती इमिग्रेशन की आग

गुरभेज सिंह की यह दर्दनाक हत्या ऐसे समय में हुई है जब पूरा यूनाइटेड किंगडम (UK) इस समय इमिग्रेशन (प्रवासन) और पब्लिक सेफ्टी (सार्वजनिक सुरक्षा) के मुद्दे पर बारूद के ढेर पर बैठा है। इस घटना से ठीक पहले उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में इमिग्रेशन-विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था, जहां गाड़ियों और घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।

ब्रिटेन के कई हिस्सों में अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे सरकार ने "नस्लवादी गुंडागर्दी" करार दिया है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में एक भारतीय युवक की इस तरह सड़क पर चाकू मारकर हत्या कर देना, कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। क्या गुरभेज किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का शिकार हुए या फिर वे ब्रिटेन में सुलग रही इस नस्लीय नफरत और अंधाधुंध हिंसा की भेंट चढ़ गए? इस खौफनाक सच के बेपर्दा होने का इंतजार अब पूरी दुनिया को है।