मां ने 2 बेटों की देखभाल के लिए रखी 2 नैनी, लेकिन सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ गई बहस?

Published : Feb 15, 2026, 11:21 AM IST
मां ने 2 बेटों की देखभाल के लिए रखी 2 नैनी, लेकिन सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ गई बहस?

सार

बेंगलुरु की एक महिला ने 2 बेटों के लिए 2 नैनी पर ₹46,000 मासिक खर्च करने का वीडियो शेयर किया। इससे बच्चों की देखभाल के खर्च और भरोसेमंद सपोर्ट के महत्व पर बहस छिड़ गई है। वह नैनी को सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानती हैं।

बेंगलुरु की रहने वाली परवीन चौधरी ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि वह अपने तीन और चार साल के दो बेटों की परवरिश के लिए अपनी नैनी को कितनी सैलरी देती हैं। इस वीडियो ने पेरेंटिंग, बच्चों की देखभाल के खर्च और घर संभालने में भरोसे और सपोर्ट के महत्व पर एक नई बहस शुरू कर दी है। परवीन जोर देकर कहती हैं कि उनके लिए नैनी सिर्फ काम करने वाली नहीं, बल्कि उनके परिवार का हिस्सा हैं। वे उनके बच्चों को प्यार, देखभाल और सुरक्षा देती हैं, जिससे परवीन को काम करने, घूमने और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने में मदद मिलती है।

दो नैनी का सपोर्ट

अपनी पोस्ट में परवीन ने बच्चों की देखभाल पर होने वाले खर्च का पूरा ब्योरा दिया है। पहली नैनी को हर महीने ₹32,000 मिलते हैं और वह दिन में 11 घंटे काम करती हैं। वह खाना पकाने, सफाई करने से लेकर जरूरत पड़ने पर रात में भी रुक जाती हैं। दूसरी नैनी एक सपोर्ट हेल्पर के तौर पर काम करती हैं, जिन्हें हर महीने ₹14,000 मिलते हैं। वह तब काम पर आती हैं जब मुख्य नैनी छुट्टी पर होती हैं या उपलब्ध नहीं होतीं।

परवीन के मुताबिक, इस व्यवस्था से उनके बच्चों को दो ऐसी महिलाएं मिली हैं जो उन्हें सुरक्षित और प्यार का एहसास कराती हैं। वह बताती हैं कि नैनी की मौजूदगी से उन्हें काम, पेरेंटिंग और अपने लिए समय निकालने में संतुलन बनाने में मदद मिलती है। इससे यह पक्का होता है कि अगर वह कभी चूक भी जाएं, तो भी उनके बच्चों को पूरी देखभाल मिले।

 

 

नैनी परिवार के सदस्य की तरह

परवीन अपने कैप्शन में बताती हैं कि वह अपनी नैनी को सिर्फ एक 'लेन-देन' का हिस्सा नहीं मानतीं। इसके बजाय, वह उन्हें अपने बच्चों के लिए 'दो प्यारी आंटियां' कहती हैं, जो ईमानदारी, भरोसे और आपसी सम्मान के महत्व को दिखाता है। वह आगे कहती हैं कि वह अपनी नैनी पर पूरी तरह भरोसा करती हैं और उनके काम में कभी दखल नहीं देतीं। बदले में, वे भी देखभाल में उम्मीद से बढ़कर काम करती हैं।

परवीन इस बात पर भी गौर करती हैं कि फुल-टाइम चाइल्डकेयर का खर्च उठा पाना एक विशेषाधिकार है। वह कहती हैं कि उनकी मदद से उनकी नैनी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाती हैं, जिसे वह इस व्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा मानती हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने खूब प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों ने परवीन की पारदर्शिता और पेरेंटिंग के तरीके की तारीफ की है…

एक यूजर ने कमेंट किया: “आपने बहुत अच्छा काम किया। मदद मांगने या अपनी जरूरतों का ध्यान रखने में कभी बुरा महसूस न करें। बहुत बढ़िया।” एक अन्य यूजर ने लिखा: “नैनी रखने का मतलब 'कम पेरेंटिंग' नहीं है, बल्कि एनर्जी के साथ बेहतर पेरेंटिंग करना है। अगर आप काम, घर और बच्चे को संभालते हुए दिन भर थके रहते हैं, तो आप शारीरिक रूप से तो मौजूद होते हैं लेकिन मानसिक रूप से थक जाते हैं। एक नैनी आपको रिचार्ज करने में मदद करती है ताकि जब आप अपने बच्चे के साथ हों, तो आप ज्यादा धैर्यवान, ज्यादा चंचल और भावनात्मक रूप से ज्यादा उपलब्ध हों। अगर आपके पास दो नैनी हैं तो यह एक बड़ी बात है।” एक तीसरे यूजर ने लिखा: “इसे शेयर करने के लिए धन्यवाद। सच में इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए।”

सही नैनी कैसे ढूंढें

अपने वीडियो में परवीन ने भरोसेमंद नैनी ढूंढने के लिए कुछ प्रैक्टिकल टिप्स भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी अपार्टमेंट सोसाइटी के व्हाट्सएप ग्रुप या MyGate जैसे ऐप का इस्तेमाल करके नैनी ढूंढती हैं। जो लोग अलग घरों में रहते हैं, उनके लिए वह पड़ोसियों और आसपास के लोगों से पूछने की सलाह देती हैं।

परवीन का यह तरीका इस बात पर जोर देता है कि सही नैनी सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि बच्चों की परवरिश में पार्टनर होती हैं, जो माता-पिता और बच्चों दोनों को सपोर्ट, सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता देती हैं।

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