Bihar Education: CM सम्राट चौधरी की नए टीचरों को नसीहत, 'कॉलेज में 75% हाजिरी पक्की करो, तभी बनेगी बात'

Bimla Kumari   | ANI
Published : Sep 13, 2026, 02:12 PM IST
Bihar Chief Minister Samrat Choudhary (Photo:ANI)

सार

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नए असिस्टेंट प्रोफेसरों से कहा है कि वे कॉलेजों में छात्रों की 75% हाजिरी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने 211 नए कॉलेज खोले हैं, लेकिन अगर बच्चे क्लास में ही नहीं आएंगे तो इन कोशिशों का कोई फायदा नहीं होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में नए नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में छात्रों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर छात्र नियमित रूप से कॉलेज नहीं आएंगे, तो उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। नए असिस्टेंट प्रोफेसरों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया।

बिहार में खुले 211 नए डिग्री कॉलेज

सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने 211 नए डिग्री कॉलेज खोले हैं और 2,451 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने इसे बिहार के उच्च शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए शिक्षकों की भूमिका सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में बने नए कॉलेजों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना और छात्रों को नियमित पढ़ाई से जोड़ना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बोले- बच्चे कॉलेज आएंगे तभी समझ आएगा संस्थान का महत्व

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक छात्र कॉलेज में आकर नियमित पढ़ाई नहीं करेंगे, तब तक नए संस्थानों और वहां उपलब्ध सुविधाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अधिक से अधिक छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में पहुंचें और कॉलेजों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनी रहे।

बिहार के लाखों छात्र पढ़ाई के लिए जा रहे बाहर

सीएम सम्राट चौधरी ने चिंता जताई कि बिहार के छात्र आज भी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली, कोटा, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों का रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 8 से 10 लाख छात्र पढ़ाई के लिए बिहार से बाहर जाते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य में डिग्री कॉलेजों और बेहतर शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार से छात्रों को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं।

शिक्षकों को विदेश भेजने की भी तैयारी

मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार 10 अच्छे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की पहचान करेगी और बिहार के शिक्षकों को उनके साथ संवाद का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनिंदा 100 शिक्षकों को एक महीने के विशेष कोर्स के लिए विदेश भेजा जाए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को समझ सकें।

अब संख्या के साथ गुणवत्ता पर भी फोकस

सम्राट चौधरी ने कहा कि एक समय बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में संख्या बढ़ाने के दौरान गुणवत्ता से समझौता हुआ, लेकिन अब सरकार दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉलेजों का इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन किसी संस्थान की असली सफलता वहां के शिक्षकों और शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार अपने बजट का 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शिक्षा क्षेत्र पर खर्च करता है। इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं।

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को टक्कर देने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को अपने छात्रों को राज्य में बेहतर अवसर देने के लिए निजी विश्वविद्यालयों और बड़े शैक्षणिक संस्थानों के स्तर की सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने नए असिस्टेंट प्रोफेसरों से 211 नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने और बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

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