पप्पू यादव को आधी रात क्यों कंधे पर लाद ले गई पुलिस? जानें क्या है 31 साल पुराना केस?

Published : Feb 07, 2026, 07:24 AM ISTUpdated : Feb 07, 2026, 10:15 AM IST

Pappu Yadav Arrest: बिहार के सांसद पप्पू यादव 31 साल पुराने जमीन विवाद मामले में गिरफ्तार। कोर्ट में पेश न होने पर पटना पुलिस की कार्रवाई। अपराध, राजनीति और सत्ता के बीच पप्पू यादव का सफर फिर चर्चा में है। क्या पप्पू यादव इस केस से बच पाएंगे? 

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पटना: बिहार के पूर्णिया से सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव को आधी रात पुलिस उनके घर से कंधे पर टांग ले गई। सांसद की गिरफ्तारी के बाद हड़कंप मच गया। पुलिस ने गिरफ्तारी की वजह 31 साल पुराने एक जमीन के विवाद में चल रहे ट्रायल में लगातार अनुपस्थित रहना बताया है। 

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1995 का जमीन विवाद मामला आखिर है क्या?

पटना एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला पुराने IPC (भारतीय दंड संहिता) के तहत दर्ज था, जिसे अब BNS (भारतीय न्याय संहिता) में बदल दिया गया है। सांसद को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वह निर्धारित तारीख पर कोर्ट में नहीं पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। मामला गर्दनीबाग पुलिस स्टेशन से जुड़ा हुआ है और इसमें धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120B शामिल हैं। इस मामले में आरोप हैं कि पप्पू यादव ने जमीन को लेकर कुछ गलत कार्य किए थे, जिसके लिए कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। कोर्ट में अनुपस्थिति चल रहे थे, जिससे ट्रायल लंबित चल रहा था। सांसद पर धोखाधड़ी, चोरी, धमकी और साजिश के आरोप भी शामिल हैं।

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पुलिस ने गिरफ्तारी कैसे की और मेडिकल जांच की तैयारी

एसपी सिटी पटना ने बताया कि सांसद के साथ उनका केयरटेकर भी था। गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में रखा जाएगा। पुलिस ने कहा कि मामले की आगे की जांच चल रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जल्द ही शुरू होगी। यह गिरफ्तारी इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि यह 1995 का लंबित मामला है, जो अब तक कोर्ट में लंबित था।

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क्या यह मामला बिहार में राजनीतिक हलचल पैदा करेगा?

सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह मामला न केवल लंबित जमीन विवाद, बल्कि IPC और BNS धाराओं के तहत कार्रवाई के कारण भी चर्चा में है। जनता और मीडिया इस मामले की अगली घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

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पप्पू यादव कौन हैं? 

राजेश रंजन, जिन्हें पूरा देश पप्पू यादव के नाम से जानता है, बिहार की राजनीति का एक चर्चित और विवादित चेहरा हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1967 को बिहार के मधेपुरा जिले में हुआ। शुरुआत अपराध की दुनिया से मानी जाती है, लेकिन 1990 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही कोसी इलाके में एक मजबूत नेता बन गए।

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अपराध की छवि के बावजूद जनता का भरोसा कैसे मिला?

पप्पू यादव कई बार सांसद चुने गए-1991, 1996, 1999, 2004, 2014 और 2024 में। उन्होंने अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उनकी जीत अक्सर पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत पकड़ और जनसमर्थन की वजह से मानी गई।

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जेल, सजा और फिर राजनीति में वापसी-कैसे बदली कहानी?

2008 में उन्हें हत्या के एक मामले में सजा हुई, जिससे वे कुछ समय के लिए राजनीति से बाहर हो गए। लेकिन बाद में बरी होने के बाद उन्होंने जोरदार वापसी की। 2014 में वे फिर सांसद बने और संसद में सक्रिय भूमिका निभाई। 2015 में उन्होंने जन अधिकार पार्टी बनाई, लेकिन चुनावों में सफलता नहीं मिली। आखिरकार 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। उसी साल उन्होंने पूर्णिया सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया।

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