
CJI Surya Kant Ultimatum: दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का असर अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने साफ संकेत दिया कि यदि लंच तक स्थिति सामान्य नहीं हुई तो वे स्वयं हस्तक्षेप करेंगे। यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन समेत कई स्टेशनों के बंद होने से वकीलों, पक्षकारों और अदालत के कर्मचारियों को भारी परेशानी हो रही है।
SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने CJI की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने कहा कि दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद होने से कोर्ट तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन वकीलों, रजिस्ट्री कर्मचारियों और अधिकृत लोगों के पास वैध प्रॉक्सिमिटी कार्ड या पहचान पत्र हैं, उन्हें सुरक्षा जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति दी जाए। उनका तर्क था कि मेट्रो स्टेशन पर ही सुरक्षा जांच कर केवल अधिकृत लोगों को बाहर आने दिया जा सकता है, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और न्यायिक कार्य भी प्रभावित न हो।
#BREAKING "Don't waste our time," CJI Surya Kant on plea against police action on student protesters during #CJP march. "We are not interested in videos, we don't have time to watch," CJI tells lawyer who said there are videos showing police atrocities.
VIDEO | Delhi: On SC… pic.twitter.com/KA2Z9FhcDx— Adv.Narendra Mishra(supreme court) (@Mishra1Narendra) July 23, 2026
इस गंभीर संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने तुरंत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस आपातकालीन स्थिति को उठाया। विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि मेट्रो स्टेशन बंद होने से वकीलों और वादियों के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचना नामुमकिन हो गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए CJI सूर्य कांत ने कड़ा रुख अपनाया और प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दे दिया। CJI ने तल्ख लहजे में कहा, "मैंने उन्हें सुबह ही बता दिया था। अधिकारियों से बात करना उन पर निर्भर है। अगर लंच के समय तक कोई समाधान निकल आता है, तो ठीक है। वरना, अगर मेरे दखल की ज़रूरत पड़ी, तो मैं खुद दखल दूंगा।"
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मेट्रो बंद होने के कारण वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों की अनुपस्थिति को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने एक बड़ा और राहत भरा निर्देश जारी किया। सीजेआई सूर्य कांत ने सभी संबंधित अदालतों को स्पष्ट आदेश दिया कि मौजूदा हालात और मेट्रो पाबंदियों के कारण जो वकील समय पर कोर्ट रूम में नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके मामलों में उनके खिलाफ कोई भी 'प्रतिकूल आदेश' (Adverse Order) पारित नहीं किया जाना चाहिए। इस मानवीय और सख्त कदम ने उन सैकड़ों वकीलों को बड़ी राहत दी, जो दिल्ली की बंद सड़कों और मेट्रो के बाहर फंसे हुए थे और जिन्हें अपने केस के खारिज होने का डर सता रहा था।
#WATCH | Delhi: Sixteen metro stations, including Lok Kalyan Marg, Rajiv Chowk, Patel Chowk, Ramakrishna Ashram Marg, Barakhamba Road, Supreme Court, Seva Teerth, Janpath, Mandi House, Central Secretariat, ITO, Delhi Gate, Indraprastha, Khan Market, Jor Bagh and Shivaji Stadium,… pic.twitter.com/YGu99QhqQs
— ANI (@ANI) July 23, 2026
सुनवाई के दौरान SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने इस गतिरोध को खत्म करने के लिए एक बेहद व्यावहारिक और जासूसी थ्रिलर जैसा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मेट्रो के भीतर सुरक्षा का पूरा नियंत्रण होता है। ऐसे में जिन वकीलों, रजिस्ट्री कर्मचारियों और अधिकारियों के पास सुप्रीम कोर्ट के वैध 'प्रॉक्सिमिटी कार्ड' या आधिकारिक पहचान पत्र हैं, उन्हें गहन सुरक्षा जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के एग्जिट पॉइंट से बाहर आने की विशेष अनुमति दी जानी चाहिए। जो आम मुसाफिर या प्रदर्शनकारी हैं, उन्हें ट्रेन के भीतर ही रखकर आगे के स्टेशनों की तरफ भेजा जा सकता है। CJI ने इस सुझाव की सराहना करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पहले ही दिल्ली मेट्रो के आला अधिकारियों से इस फॉर्मूले पर बात कर रहा है।
छात्रों के उग्र प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था के नाम पर 16 मेट्रो स्टेशनों की इस अचानक तालाबंदी ने दिल्ली को एक बड़े असमंजस में डाल दिया है। DMRC ने इन स्टेशनों को "अगले आदेश तक" बंद रखने का फरमान सुनाया है, तो दूसरी तरफ देश के सर्वोच्च न्यायाधीश ने 'लंच' तक की समय सीमा तय कर दी है। अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह बन गया है कि क्या दिल्ली मेट्रो प्रशासन और पुलिस सुरक्षा एजेंसियां सीजेआई के अल्टीमेटम के आगे कोई बीच का रास्ता निकाल पाएंगी, या फिर दोपहर के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत खुद सीधे हस्तक्षेप करके इस मेट्रो तालाबंदी को पलटने का कोई ऐतिहासिक आदेश जारी करेगी? पूरी दिल्ली की नजरें अब लंच के बाद होने वाली हलचल पर टिकी हैं।
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