
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 फरवरी को बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पहले उनके मन की बात समझी और फिर खुलकर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने छात्रों की शंकाओं को सुना और उनके समाधान भी बताए।
डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने, कड़ी मेहनत करने और आत्मविश्वास बनाए रखने के मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि वे पहले शनिवार को आने वाले थे, लेकिन व्यस्तता के कारण नहीं आ सके। अब वे अपना वादा निभाने आए हैं और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के गार्जियन की भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी छात्रों को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को शिवाजी नगर स्थित सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में ‘परीक्षा पर संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के मन में उठने वाली शंकाओं पर चर्चा करना और उनका समाधान देना था।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन की अंतिम कसौटी नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास और अनुशासन की पहचान है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को तनाव से दूर रहकर परीक्षा देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, सही समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। संवाद के दौरान डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थी एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई करें और चिंतन-मनन को अपनी पढ़ाई का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल मूल्यांकन का माध्यम है, इसे डर का कारण नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने छात्रों से कहा कि यदि पहली बार सफलता न मिले तो घबराएं नहीं, बल्कि और अधिक आत्मविश्वास के साथ दोबारा प्रयास करें। सफलता निरंतर मेहनत से ही मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी कार्यशैली, अनुशासन और दूरदर्शिता से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि वे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक और राजनेता बनना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट रखें और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करें।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि परीक्षा शब्द सुनते ही बच्चे तनाव में आ जाते हैं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है, चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में परीक्षा को तनाव नहीं, बल्कि उत्सव और अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर साल ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम करते हैं, जिससे देशभर के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन मिलता है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल, लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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