
लखनऊ, 14 फरवरी। उत्तर प्रदेश सरकार के धार्मिक पर्यटन स्थलों की विकास परियोजनाओं के लिए बजट 2026-27 में विशेष प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य काशी, अयोध्या, प्रयागराज की तर्ज पर नैमिषारण्य, चित्रकूट, देवीपाटन, विन्ध्यवासिनी धाम और शुकतीर्थ जैसे तीर्थस्थलों के विकास कार्यों को गति प्रदान करना है। प्रदेश के तीर्थ स्थलों में पहले से ही विभिन्न विकास परियोजनाएं चल रही हैं, इस राशि के उपयोग से विकास कार्य को गति मिलेगी, साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। प्रदेश सरकार के इस कदम के बारे में मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शिरीष मिश्रा का कहना है कि "धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट में मिली राशि योगी सरकार की धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास की नीति का हिस्सा है। इस धनराशि के उपयोग से एक ओर यूपी में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।"
सीतापुर जनपद में स्थित नैमिषारण्य तीर्थ स्थल में पर्यटन अवस्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध नैमिषारण्य तीर्थस्थल में पहले से ही 38 परियोजनाएं चल रही हैं। जिनमें से नौ का काम लगभग पूरा हो चुका है। बजट में स्वीकृत धनराशि से शेष परियोजनाओं का निर्माण तेज गति से पूरा किया जा सकेगा। इस क्रम में नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र में घाटों का सुंदरीकरण, मार्गों का चौड़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यह तीर्थ क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों एवं तीर्थ स्थल में रहने वाले साधु- संतों को भी सुविधा प्रदान करेगा।
योगी सरकार की मंशा चित्रकूट धाम को भी काशी और अयोध्या की तर्ज पर प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की है। इस दिशा में चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे धाम क्षेत्र में कामदगिरि परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण, देवांगना एयरपोर्ट के पास पर्यटन सुविधा केंद्र का निर्माण, राम वनगमन मार्ग के पड़ाव स्थलों पर सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही मंदाकिनी नदी के रामघाट, तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर और महर्षि वाल्मीकि आश्रम के सौंदर्यीकरण का कार्य भी शामिल है।
मिर्जापुर जनपद के विंध्यवासिनी धाम में विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जिससे तीर्थ क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में मार्गों के चौड़ीकरण, लाइट, पार्किंग व्यवस्था के साथ आश्रय स्थल का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही गंगा जी के पास पक्के घाटों का निर्माण किया जाएगा। वहीं विन्ध्यक्षेत्र में स्थित मां अष्टभुजा देवी मंदिर, कालीखोह और विंध्यवासिनी मंदिर के त्रिकोणीय परिक्रमा मार्ग के निर्माण के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।
बलरामपुर जिले में स्थित देवीपाटन धर्मस्थल में भी विकास कार्यों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि के माध्यम से मां पाटेश्वरी देवी के मंदिर का सौंदर्यीकरण के साथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसी क्रम में हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ के समेकित विकास की परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे तीर्थक्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और गंगा जी के घाटों के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। वहीं मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ के लिए स्वीकृत 15 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग शुकदेव आश्रम, गणेश धाम के पुनर्निमाण में किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के अन्य प्राचीन संरक्षित मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। योगी सरकार की इस पहल से न केवल प्रदेश के प्राचीन तीर्थ स्थलों का कायकल्प हो रहा है बल्कि पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी विकास होगा।
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