
Cockroach Milk vs Cow Milk: जब भी दूध का नाम आता है, हमारे दिमाग में गाय, भैंस या ज्यादा से ज्यादा बादाम और सोयाबीन (Soya Milk) का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कॉकरोच (Cockroach) को देखकर लोग डर के मारे चप्पल उठा लेते हैं, उसका दूध दुनिया का सबसे ताकतवर सुपरफूड (Superfood) बन सकता है? सुनने में यह बात अजीब और थोड़ी घिनौनी जरूर लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों की रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। साइंस का मानना है कि एक खास प्रजाति के कॉकरोच का दूध सेहत के मामले में गाय के दूध से भी 4 गुना ज्यादा ताकतवर और फायदेमंद होता है। आइए कॉकरोच जनता पार्टी की देशभर में चर्चा के बीच जानते हैं कि इस 'कॉकरोच मिल्क' का पूरा सच क्या है, यह कैसे बनता है और इसे इतना पावरफुल क्यों माना जा रहा है...
सबसे पहले यह जान लीजिए कि आपके घर की रसोई या गंदे नालों में रेंगने वाले आम कॉकरोच दूध नहीं देते हैं। इसके लिए दुनिया में एक बहुत ही खास और अलग प्रजाति पाई जाती है। अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ शारजाह (UAE) कॉकरोच से एंटीबायोटिक बनाने पर रिचर्च कर रही है। वहीं, चीन में अमेरिकन कॉकरोच का इस्तेमाल पेट से जुड़ी दवाईयां बनाने में होता है। इसी तरह की रिसर्च में कॉकरोच के दूध की ताकत का पता चला है। दूध देने वाला कॉकरोच का नाम पैसिफिक बीटल कॉकरोच (Pacific Beetle Cockroach) है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा कॉकरोच है, जो अंडे देने के बजाय इंसानों और जानवरों की तरह सीधे बच्चों को जन्म देता है।
जब मादा कॉकरोच के पेट में बच्चे पल रहे होते हैं, तो उन्हें जिंदा रखने और पोषण देने के लिए उसके शरीर के अंदर एक लिक्विड (तरल पदार्थ) निकलता है। यह लिक्विड उसके पेट में जाकर ठोस क्रिस्टल (छोटे-छोटे दानों) के रूप में बदल जाता है। इसी को वैज्ञानिक 'कॉकरोच मिल्क' कहते हैं।
वैज्ञानिकों ने जब लैब में इस कॉकरोच के दूध के क्रिस्टल्स की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। इसमें वो सब कुछ मिला जो एक इंसान को फौलाद जैसा मजबूत बनाने के लिए जरूरी होता है। इस दूध में गाय या भैंस के दूध के मुकाबले 4 गुना ज्यादा प्रोटीन और न्यूट्रिशन पाया जाता है। जिम जाने वाले लोग जो प्रोटीन शेक पीते हैं, यह उससे भी कहीं ज्यादा गाढ़ा और असरदार होता है। कॉकरोच मिल्क में भरपूर मात्रा में कैलोरी और जरूरी अमीनो एसिड्स होते हैं, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। इस दूध की सबसे खास बात यह है कि जैसे ही यह पेट में जाता है, इसके क्रिस्टल धीरे-धीरे शरीर में घुलते हैं। इससे शरीर को लंबे समय तक लगातार ताकत मिलती रहती है।
कॉकरोच के पेट से दूध के छोटे-छोटे क्रिस्टल्स को निकालने के लिए वैज्ञानिकों को बहुत बारीक काम करना पड़ता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मात्र एक गिलास दूध तैयार करने के लिए करीब 400 से ज्यादा कॉकरोच की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि इसे निकाल पाना फिलहाल नामुमकिन है। वैज्ञानिक अब लैब में इसका नकली या कृत्रिम (Artificial) रूप तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कॉकरोच को बिना नुकसान पहुंचाए यह ताकतवर फॉर्मूला सबको मिल सके।
भले ही लोग इसे सीधे तौर पर पीना पसंद न करें, लेकिन दुनिया के कई देशों जैसे चीन और यूएई में कॉकरोच से बनी दवाइयों की भारी मांग है। कॉकरोच के शरीर के तत्वों से पेट दर्द की दवाइयां, जले हुए घाव को ठीक करने वाली क्रीम और भयंकर इंफेक्शन को खत्म करने वाले कैप्सूल बनाए जा रहे हैं।
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