कौन हैं आकांक्षा सिंह? एक साल में 3 राष्ट्रीय सम्मान! CSIR की इस युवा वैज्ञानिक ने कैसे रचा इतिहास?

Published : Aug 09, 2026, 03:26 PM IST
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सार

एक साल और तीन बड़े राष्ट्रीय पुरस्कार! क्या है CSIR वैज्ञानिक डॉ. आकांक्षा सिंह का वह गुप्त फॉर्मूला, जिससे भारतीय खेती और फसलों की किस्मत बदलने वाली है? जानिए विज्ञान की इस अभूतपूर्व हैट्रिक का पूरा सच।

लखनऊ: जहां शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए जीवन में एक भी राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार पाना किसी बड़े सपने के सच होने जैसा होता है, वहीं CSIR-CIMAP (सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आकांक्षा सिंह ने वर्ष 2026 में सम्मानों की एक दुर्लभ और ऐतिहासिक हैट्रिक बनाकर भारतीय वैज्ञानिक बिरादरी को आश्चर्यचकित कर दिया है। एग्रीकल्चरल एंड प्लांट साइंसेज के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए हाल ही में उन्हें NASI यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड 2026 के लिए चुना गया है। इससे पहले इसी वर्ष उन्हें इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंसेज (INYAS) की सदस्यता मिली थी और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) का 'यंग एसोसिएट' चुना गया था। वर्ष 2026 के भीतर ये तीनों शीर्ष सम्मान हासिल कर वह देश के उन गिने-चुने चुनिंदा युवा वैज्ञानिकों की पंक्ति में शामिल हो चुकी हैं, जिन्होंने सफलता के इस शिखर को छुआ है।

प्रयोगशाला की सीक्रेट वॉल: क्या है इस अभूतपूर्व रिसर्च का रहस्य?

डॉ. आकांक्षा सिंह, जो वर्तमान में CSIR-CIMAP के क्रॉप प्रोटेक्शन एंड प्रोडक्शन डिवीजन में साइंटिस्ट-D के रूप में कार्यरत हैं, की वैज्ञानिक प्रयोगशाला में पारंपरिक फसल सुरक्षा से इतर कुछ बेहद अनूठा आकार ले रहा है। उनकी रिसर्च का मुख्य केंद्र प्लांट-माइक्रोब इंटरैक्शन (पौधों और सूक्ष्मजीवों के बीच का संबंध), जैविक फसल सुरक्षा, फंगल बीमारियां, और पर्यावरण के अनुकूल फंगीसाइड का विकास है। साधारण शब्दों में कहें तो, डॉ. सिंह यह खोज कर रही हैं कि कैसे कुछ अदृश्य, मित्र सूक्ष्मजीव (फायदेमंद माइक्रोब्स) फसलों पर हमला करने वाली हानिकारक फफूंद (फंगल बीमारियों) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच बना सकते हैं। यह शोध रसायन-मुक्त खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकता है। यह केवल बीमारियों से बचाव ही नहीं करता, बल्कि मिट्टी और पौधों के स्वास्थ्य को कुदरती रूप से बेहतर बनाकर फसल की पैदावार में भी अप्रत्याशित वृद्धि करता है।

आखिर किस रिसर्च ने दिलाई इतनी बड़ी पहचान?

डॉ. सिंह ने बॉटनी में PhD की है और फिलहाल CSIR-CIMAP के Crop Protection and Production Division में रिसर्च कर रही हैं। उनकी विशेषज्ञता का केंद्र है-पौधों और सूक्ष्मजीवों के बीच होने वाली जटिल प्रक्रिया। उनकी रिसर्च plant-microbe interaction, biological crop protection, fungal diseases, eco-friendly disease management, fungicide development और sustainable agriculture जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

खेतों में छिपा संकट और भारतीय किसानों का भविष्य

भारत जैसे विशाल कृषि-प्रधान देश में जहां करोड़ों परिवार प्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर हैं, वहां फसलों में लगने वाले फंगल संक्रमण और कीटनाशकों का बढ़ता खर्च किसानों के लिए हर साल एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। रासायनिक पेस्टिसाइड्स के अत्यधिक उपयोग से न केवल जमीन की उर्वरता नष्ट हो रही है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। डॉ. आकांक्षा सिंह का यह नवोन्मेषी जैविक तरीका किसानों को हानिकारक केमिकल्स पर अपनी निर्भरता कम करने का एक स्थायी, किफायती और सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है। यह रिसर्च न केवल फसलों को प्राकृतिक रूप से सड़ने और खराब होने से बचाएगी, बल्कि आने वाले समय में हरित और टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) की नई नींव रखेगी।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में सजेगा सम्मान का मंच

  • 1930 में स्थापित नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अकादमियों में से एक है। इसका 'यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड' उन शुरुआती करियर वाले शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में दूरगामी और प्रभावशाली बदलाव किए हों।
  • देशभर से चुने गए 16 प्रखर वैज्ञानिकों में डॉ. सिंह का नाम विशेष रूप से चमक रहा है। उन्हें यह सम्मान वाराणसी स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में 4 और 5 दिसंबर, 2026 को आयोजित होने वाले NASI के 96वें वार्षिक अधिवेशन और सिंपोजियम के दौरान औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा।
  • डॉ. आकांक्षा सिंह की यह सफलता यह साबित करती है कि भारतीय युवा वैज्ञानिक अब केवल सैद्धांतिक खोजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश के किसानों और जमीनी समस्याओं का एक व्यावहारिक व पर्यावरण-अनुकूल हल तलाशने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।

दिसंबर में मिलेगा सम्मान

डॉ. सिंह को यह सम्मान 4 और 5 दिसंबर 2026 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में होने वाले NASI के 96वें वार्षिक सत्र और सिंपोजियम के दौरान प्रदान किया जाएगा। एक ही साल में तीन राष्ट्रीय सम्मानों की यह उपलब्धि डॉ. आकांक्षा सिंह को भारतीय विज्ञान की उभरती युवा प्रतिभाओं में एक खास पहचान देती है। उनकी रिसर्च यह भी दिखाती है कि आधुनिक विज्ञान किस तरह फसल रोग, रासायनिक निर्भरता और टिकाऊ खाद्य उत्पादन जैसी जमीनी चुनौतियों के समाधान की दिशा में काम कर सकता है।

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