Delhi Dehradun Expressway viral video: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ा एक वीडियो वायरल है, जिसमें दीवारों पर आपत्तिजनक स्लोगन लिखे होने का दावा किया गया। पुलिस ने इसे भ्रामक बताया और पोस्ट शेयर न करने की अपील की है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर आपत्तिजनक स्लोगन का दावा
नए-नए बने Delhi-Dehradun Expressway से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो में हाईवे की दीवारों और फ्लाईओवर पर एक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखे होने का दावा किया जा रहा है। कुछ पोस्ट में कहा गया कि “यह हाईवे मुसलमानों के लिए नहीं है” जैसे संदेश दीवारों पर लिखे गए हैं।
वीडियो के साथ यह भी दावा किया गया कि इसकी जिम्मेदारी हिन्दू रक्षा दाल से जुड़े लोगों ने ली है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से अलग बयान सामने आया है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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पहले जानिए क्या है वीडियो में दावा?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे क्लिप में हाईवे की दीवारों पर कथित तौर पर भड़काऊ नारे लिखे दिखाई देते हैं। पोस्ट के साथ यह लोकेशन भी बताई जा रही है कि ये स्लोगन मुंडका फ्लाईओवर के पास लिखे गए हैं। कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि संगठन की महिला विंग ने इस काम को अंजाम दिया। लेकिन इन दावों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
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लोकेशन पर उठा सवाल
वीडियो में बताई गई जगह को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मुंडका के पास से देहरादून हाईवे नहीं गुजरता। यानी वीडियो में बताई गई लोकेशन और असल रूट के बीच मेल नहीं बैठ रहा। उधर, Ghaziabad Police Commissionerate ने सोशल मीडिया पर साफ किया है कि उनकी सीमा में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि धार्मिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली यह पोस्ट भ्रामक है और बिना सत्यापन के ऐसे कंटेंट को शेयर न किया जाए। पुलिस ने चेतावनी भी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
देश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के दावे सामने आते हैं। लेकिन जब बात किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नारेबाजी की हो, तो मामला संवेदनशील हो जाता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे वीडियो या पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी लोकेशन, तारीख और आधिकारिक पुष्टि जरूर जांचनी चाहिए। अधूरी जानकारी कई बार समाज में तनाव पैदा कर सकती है।
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सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जरूरी सलाह
किसी भी वायरल वीडियो को तुरंत सच न मानें।
आधिकारिक बयान या विश्वसनीय स्रोत का इंतजार करें।
धार्मिक या सामुदायिक मुद्दों पर पोस्ट शेयर करने से पहले दो बार सोचें।
पुलिस प्रशासन ने भी साफ कहा है कि भ्रामक और अपुष्ट सामग्री साझा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
फिलहाल वायरल वीडियो में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पुलिस इकाइयों ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी किसी घटना से इनकार किया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग संयम बरतें और बिना सत्यापन के किसी भी धार्मिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली सामग्री आगे न बढ़ाएं।
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