
Delhi Satya Niketan Building Collapse: साउथ दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका कहने को तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के छात्रों का गढ़ है। यहां की तंग गलियां हमेशा पढ़ाई करने आए युवाओं से गुलज़ार रहती हैं। लेकिन रविवार को यहां जो दशकों पुरानी पांच मंज़िला इमारत ढही, उसने इस पूरे इलाके की खौफनाक सच्चाई और मकान मालिकों की बेपरवाही को बेनकाब कर दिया। मरम्मत के दौरान अचानक गिरी इस इमारत के मलबे से 12 लोगों को निकाला गया, जिनमें से 7 की जान जा चुकी है। मृतकों में 5 बेकसूर छात्र शामिल थे। यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। इलाके में कई PG, हॉस्टल और किराए पर छात्रों को रहने की सुविधा देने वाली प्रॉपर्टीज हैं। इसी वजह से हादसे के बाद सिर्फ एक इमारत की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे स्टूडेंट हब में चल रहे PG और हॉस्टल पर सवाल उठ रहे हैं।
#WATCH | Satya Niketan building collapse | Visuals of the building adjoining the one that collapsed in Satya Niketan on 6th September.
As per MCD Commissioner Sanjeev Khirwar, "The building has weakened, and we will take it up for demolition in a calibrated manner in the next… pic.twitter.com/2RrbGIrpQX— ANI (@ANI) September 8, 2026
हादसे के करीब 25 घंटे बाद बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया। एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पुरानी इमारत में किस तरह का निर्माण और मरम्मत कार्य कराया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा है कि सुरक्षा मानकों और जरूरी अनुमति का पालन किया गया था या नहीं।
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे का मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। कोर्ट ने घटना की उच्च-स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने MCD से पूछा है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसके पास जरूरी मंजूरियां थीं या नहीं। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि कहीं इस मामले में सिविक अधिकारियों की ओर से कोई लापरवाही तो नहीं हुई। अदालत ने यह भी कहा है कि अगर जांच में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी जाए।
Delhi MCD orders immediate sealing of all illegal buildings exceeding four floors following the collapse of a five-storey building in South Delhi
CCTV footage has emerged showing the moment the PG building collapsed in Delhi’s Satya Niketan
6 people died, 11 have been rescued… pic.twitter.com/w5YRIXus8h— Nabila Jamal (@nabilajamal_) September 7, 2026
गिरफ्तारी के बाद मुख्य मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला को दिल्ली की अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, उनके बेटे महेश बंसल को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस उससे हादसे के संबंध में पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस कथित संरचनात्मक लापरवाही, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और इमारत में कराए जा रहे काम से जुड़े पहलुओं पर है।
इस पूरी त्रासदी में सबसे भावुक कर देने वाली कहानी 19 साल के अर्पित की है। आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज (ARSD) में सेकेंड ईयर का छात्र अर्पित रविवार सुबह ही मध्य प्रदेश स्थित अपने घर से रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली वापस लौटा था। उसकी मां ने उससे दिल्ली न जाने की गुहार लगाई थी, लेकिन किसे पता था कि काल वहाँ उसका इंतजार कर रहा है। बेटे का शव देखकर बेसुध हुई मां को AIIMS में भर्ती कराना पड़ा। इस असहनीय गम के बीच भी अर्पित के परिवार ने बड़ा दिल दिखाया। उन्होंने अर्पित की कॉर्निया दान करने का फैसला किया, ताकि उनकी आंखों से कोई और इस दुनिया को देख सके। एक होनहार बेटे को खोने के बाद भी परिवार का यह फैसला मिसाल बन गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद पुलिस ने हताहत हुए लोगों के नाम जारी किए हैं।
दिवंगत (7):
अस्पताल में भर्ती घायल (5): अस्पताल में भर्ती असगर अली (30), नीरज बावा (19), आदित्य कुमार (19), नीतीश चिब (19) और मो. अयान (18) का इलाज जारी है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है।
मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने MCD से साफ पूछा है कि क्या इस बहुमंजिला इमारत के पास जरूरी स्वीकृतियां थीं और लापरवाही बरतने वाले सिविक अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई, इसका ब्योरा पेश किया जाए। इधर, उप-राज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में LG सचिवालय में एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। इसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, NDRF चीफ और MCD कमिश्नर मौजूद रहे।
हादसे के बाद जिस ढही हुई इमारत का रेंट एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उसने यहां के पीजी बिजनेस के काले सच को सामने रख दिया है। एग्रीमेंट में एक शर्त साफ लिखी थी-"PG प्रशासन मेरे (छात्र) के साथ होने वाले किसी भी हादसे या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।" छात्रों से तीन-तीन महीने की सिक्योरिटी, एडवांस किराया और मनमाना बिजली बिल तो वसूल लिया जाता है, लेकिन बदले में मिलता है एक ऐसा कानूनी कागज जो मालिक को हर हादसे से बरी कर देता है। छात्र यहाँ अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं, क्योंकि सिस्टम और मकान मालिक दोनों ने ही किराएदारों की सुरक्षा से पूरी तरह आँखें मूंद रखी हैं।
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