
राम मंदिर चंदा विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। भोपाल में महिला कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन, चंदे और भाजपा-आरएसएस को लेकर कई बड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन की असली लड़ाई संतों और मठों ने लड़ी थी, जबकि भाजपा और आरएसएस बाद में इससे जुड़े। साथ ही उन्होंने राम मंदिर चंदा मामले में अयोध्या जाकर मुकदमा दर्ज कराने का ऐलान भी किया।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हनुमानगढ़ी और गोरखनाथ मठ जैसे धार्मिक संस्थानों ने राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनके मुताबिक, उस समय न आरएसएस की भूमिका थी और न ही भाजपा की मौजूदगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर जुटाए गए धन का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए जो चंदा दिया था, उसके कथित दुरुपयोग को लेकर अब कानूनी कार्रवाई करेंगे।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राम मंदिर चंदा मामले में कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग पहले भी उठाई गई थी, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। दिग्विजय सिंह ने बताया कि अपने वकील की सलाह पर वह 5 या 6 जुलाई को अयोध्या जाकर मुकदमा दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि आस्था के नाम पर दिए गए दान के कथित दुरुपयोग की जांच होनी चाहिए और यदि गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
राम मंदिर के अलावा दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर के चंदे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वहां भी चंदे में गड़बड़ी की बात सामने आए तो यह हैरानी की बात नहीं होगी। हालांकि, दिग्विजय सिंह के ये आरोप उनके सार्वजनिक बयान पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। फिलहाल, राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर उनके अयोध्या जाकर मुकदमा दर्ज कराने के ऐलान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
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