
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बदले वहां की सरकार अमेरिका को 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल देगी। ट्रंप के इस बयान ने जहां वेनेजुएला में कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है, वहीं दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी संप्रभु देश के प्राकृतिक संसाधनों पर इस तरह कब्जा करना एक नई और चिंताजनक बात है।
मंगलवार को यहां बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के साथ हुए हमारे समझौते के मुताबिक, मादुरो को हटाने के बदले वह देश हमें 5 करोड़ बैरल तेल देगा। हम उसे रिफाइन करेंगे। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था और वेनेजुएला के लोगों, दोनों के लिए फायदेमंद है।' उन्होंने यह भी बताया कि इस तेल की कीमत करीब 25,000 करोड़ रुपये होगी।
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि वेनेजुएला ने हमारा तेल हड़प लिया है। अब मादुरो के हटने के बाद अमेरिकी कंपनियां वहां निवेश करेंगी। हम अपने हिस्से का तेल वापस ले लेंगे।
वाशिंगटन: डेनमार्क के इस बयान पर कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अमेरिका की कोई भी कोशिश NATO को खत्म कर सकती है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारों-इशारों में पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के बिना NATO का कोई वजूद नहीं है। इसे NATO देशों के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश माना जा रहा है।
इस बारे में ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, 'मेरे सत्ता में आने से पहले, NATO देश अपनी जीडीपी का सिर्फ 2% ही सेना पर खर्च करते थे। लेकिन मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद, मैंने उन्हें यह खर्च 5% तक बढ़ाने पर मजबूर किया। अगर मैंने दखल न दिया होता, तो आज यूक्रेन रूस के कब्जे में होता। मैंने 8 युद्ध रोके। फिर भी, NATO सदस्य देश बेवकूफ नॉर्वे ने मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया। लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है। अहम बात यह है कि मैंने लाखों लोगों की जान बचाई। अमेरिका के बिना NATO से रूस और चीन जरा भी नहीं डरेंगे। लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि जब हमें मदद की जरूरत होगी तो NATO हमारी मदद के लिए आएगा। पर हम हमेशा NATO के साथ रहेंगे।'
वाशिंगटन: अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने उत्तरी अटलांटिक में रूस में रजिस्टर्ड 'मरीनेरा' नाम के एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था। पता चला है कि इस जहाज का पहले नाम 'बेला-1' था और इसका वेनेजुएला से भी कनेक्शन था।
इस बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने बताया, 'पिछले 2 हफ्तों से हमारी सेना जिस 'बेला-1' नाम के व्यापारिक जहाज का पीछा कर रही थी, उसे उत्तरी अटलांटिक में जब्त कर लिया गया है।' इसके तुरंत बाद रूस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'किसी भी देश को दूसरे देशों के जहाजों पर सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।' साथ ही, यह भी पता चला है कि अमेरिकी सैनिकों के कब्जे से पहले रूस ने अपनी नौसेना के जरिए इसे बचाने की कोशिश की थी।
ईरान समर्थित लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन के लिए माल की तस्करी करने के आरोप में अमेरिका ने 2024 में 'बेला-1' पर प्रतिबंध लगाया था। पिछले दिसंबर में जब यह वेनेजुएला की ओर जा रहा था, तो अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस पर चढ़कर इसे काबू में करने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे थे। इस बार इसका नाम बदलकर 'मरीनेरा' कर दिया गया था और इस पर रूसी झंडा लगा दिया गया था। लेकिन अमेरिका ने इसका पता लगा लिया और वायु सेना की मदद से पीछा करके इसे जब्त कर लिया।
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