ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ा रहा है। यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है और परमाणु हमलों से कई देशों को नक्शे से मिटा सकता है। यूरोप से एशिया तक कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा खतरनाक टकराव दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर ले आया है। ईरान ने तेल सप्लाई रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की धमकी दी है, जिससे ग्लोबल इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ रहा है। लेकिन असली डर तेल महंगा होने का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि अगर ये तनाव एक बड़ी जंग में बदल गया, तो दुनिया के नक्शे से कुछ हिस्से हमेशा के लिए मिट जाएंगे। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि तबाही उन देशों से शुरू होगी जो इन महाशक्तियों के सीधे निशाने पर हैं।

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मौजूदा हालात में ईरान, इजरायल और अमेरिका का झगड़ा सिर्फ एक सीमा विवाद नहीं रह गया है। यह पूरी दुनिया को 'ग्रेट रिसेट' यानी एक महाविनाश की ओर धकेल रहा है। अगर तेल की राजनीति और दबदबे की यह लड़ाई भड़क गई, तो डर है कि कुछ देश हमेशा के लिए दुनिया के नक्शे से गायब हो जाएंगे।

इजरायल और ईरान का आमना-सामना

तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी पश्चिम एशिया से ही भड़क सकती है। इस जंग के मुख्य खिलाड़ी इजरायल और ईरान होंगे, जो एक-दूसरे का वजूद मिटाने पर तुल जाएंगे। इजरायल अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी से ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाएगा, तो वहीं ईरान अपने समर्थक गुटों के जरिए इजरायल के रिहायशी इलाकों को कब्रिस्तान बनाने की तैयारी में है। अगर इस इलाके के तेल के कुओं में आग लग गई, तो यहां का आसमान दशकों तक काले धुएं से ढका रहेगा और इंसानों का जिंदा रहना नामुमकिन हो जाएगा।

यूरोप का युद्धक्षेत्र: यूक्रेन, पोलैंड और NATO की मुश्किल

रूस और यूक्रेन का संघर्ष जैसे ही विश्व युद्ध में बदलेगा, इसका असर सिर्फ कीव तक सीमित नहीं रहेगा। NATO की एंट्री होते ही पोलैंड और बाल्टिक देश रूस की मिसाइलों का पहला निशाना बनेंगे। जर्मनी जैसे देशों में मौजूद मिलिट्री बेस पर भी रूस के परमाणु हमले का खतरा है। कुल मिलाकर, यूरोप का एक बड़ा और विकसित हिस्सा इस आधुनिक जंग की चपेट में आकर तबाह हो जाएगा।

ताइवान और कोरिया

पश्चिम में अमेरिका को उलझा देख चीन मौके का फायदा उठा सकता है और ताइवान पर बिजली की तेजी से हमला कर सकता है। ताइवान का छोटा आकार और चीन की विशाल सैन्य ताकत के सामने वह कुछ ही घंटों में अपना वजूद खो सकता है। इसी दौरान, उत्तर कोरिया का तानाशाह दक्षिण कोरिया और जापान पर मिसाइलों की बारिश कर सकता है। टोक्यो और सियोल जैसे घनी आबादी वाले शहर पलक झपकते ही रेगिस्तान में बदल सकते हैं।

महाशक्तियों का अंत: वॉशिंगटन से मॉस्को तक

विश्व युद्ध का आखिरी चरण अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों पर सीधा असर डालेगा। लंबी दूरी की मिसाइलें लंदन, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन को श्मशान बना सकती हैं, तो बदले में रूस के बड़े शहर जैसे मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग भी राख हो जाएंगे। यहां अगर मौत तुरंत नहीं भी हुई, तो फैलता हुआ परमाणु रेडिएशन आने वाली पीढ़ियों को भी बर्बाद कर देगा। कोई भी बंकर या खाई इस रेडिएशन से नहीं बचा पाएगी।

महायुद्ध में गरीब देश होंगे पहले शिकार

जंग सिर्फ बमों से ही लोगों को नहीं मारती, बल्कि भूख से भी पूरे-पूरे देशों को खत्म कर देती है। अगर ईरान ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद कर दिया, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुक जाएगी। इसका सीधा असर अफ्रीका और एशिया के उन गरीब देशों पर पड़ेगा जो इम्पोर्ट पर निर्भर हैं। जब ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप होगा, तो खाने-पीने की चीजों की सप्लाई भी रुक जाएगी। नतीजा यह होगा कि जंग के मैदान से दूर बैठे देश भी भूख और कंगाली की वजह से सबसे पहले तबाह होंगे।