
एक डच रिसर्चर, जिन्होंने पहले तुर्की-सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप से पहले सीस्मिक एक्टिविटी को लेकर टिप्पणी की थी, एक बार फिर बड़े भूकंप की संभावना को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उनकी पिछली चेतावनी के बाद कई लोगों का ध्यान उनकी रिसर्च की ओर गया था। अब उन्होंने फिर से एक नई चेतावनी जारी की है।
सोलर सिस्टम ज्योमेट्री सर्वे (SSGEOS) से जुड़े डच रिसर्चर फ्रैंक हूगरबीट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में पृथ्वी पर बड़ी भूकंपीय गतिविधि देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, ग्रहों की स्थिति और अंतरिक्ष की घटनाओं के आधार पर पृथ्वी पर भूकंप की संभावना का आकलन किया जा सकता है।
फ्रैंक हूगरबीट्स ने कहा कि ग्रहों की विशेष स्थिति और चांद की गतिविधियों (लूनर पीक्स) के कारण पृथ्वी पर भूकंपीय हलचल बढ़ सकती है। उनका दावा है कि इन खगोलीय परिस्थितियों के आधार पर 10 मार्च के आसपास किसी बड़ी भूकंपीय घटना की संभावना काफी ज्यादा हो सकती है। फ्रैंक हूगरबीट्स पहले भी उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने तुर्की और सीरिया में आए भयानक भूकंप से पहले सीस्मिक एक्टिविटी को लेकर चेतावनी दी थी। उस घटना के बाद उनकी भविष्यवाणी को लेकर सोशल मीडिया और वैज्ञानिक समुदाय में काफी चर्चा हुई थी।
हाल ही में सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में हूगरबीट्स ने लिखा कि हाल के दिनों में ग्रहों की एक खास स्थिति बनने के बाद चांद की एक चोटी (लूनर पीक) भी सामने आई है। उनके मुताबिक, ग्रहों की इस स्थिति के बाद चांद की गतिविधि ने पहले ही कई तेज भूकंपों के झटकों की शुरुआत कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे आने वाले दिनों में भूकंपीय गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
हूगरबीट्स ने इस महीने की शुरुआत में जारी अपने एक वीडियो में दिखाए गए एक ग्राफ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आज चांद की चोटी है, जो पिछले दो दिनों में ग्रहों की चोटी के बाद आई है। इसके बाद पहले ही कई तेज भूकंपों के झटकों का सिलसिला शुरू हो चुका है। 10 मार्च के आसपास एक बड़ी भूकंपीय घटना की बहुत ज्यादा संभावना है।”
फ्रैंक हूगरबीट्स 2023 में तुर्की और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद काफी चर्चा में आए थे, जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी। उस आपदा से पहले ग्रहों की स्थिति को लेकर उनके सोशल मीडिया पोस्ट को कुछ यूजर्स ने बाद में भूकंप की भविष्यवाणी से जोड़कर देखा था। इसी वजह से उनकी रिसर्च और दावों पर लोगों का ध्यान गया।
हालांकि, कई वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हूगरबीट्स के इन दावों पर कड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि हूगरबीट्स जिन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें वैज्ञानिक समुदाय में मान्यता नहीं मिली है। इसलिए इन दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने उनकी नई चेतावनी की आलोचना की है और इसे स्यूडोसाइंस (Pseudo-science) बताया है। कुछ लोगों ने बिना प्रमाणित भविष्यवाणियों के आधार पर डर फैलाने को गलत बताया।
भूकंप की भविष्यवाणी को लेकर वैज्ञानिक संस्थाओं की राय काफी स्पष्ट है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, फिलहाल किसी भी तकनीक से भूकंप का सटीक समय और स्थान बताना संभव नहीं है। USGS का कहना है कि अब तक न तो उसने और न ही किसी अन्य वैज्ञानिक संस्था ने किसी बड़े भूकंप का सफलतापूर्वक सटीक अनुमान लगाया है।
वैज्ञानिक आम तौर पर पुराने डेटा और जियोलॉजिकल स्टडीज के आधार पर यह अंदाजा लगाते हैं कि किसी क्षेत्र में लंबे समय में भूकंप आने की संभावना कितनी है। इसके लिए रिसर्चर हैज़र्ड मैपिंग और स्टैटिस्टिकल मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। इन तरीकों से यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-से इलाके भूकंप के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं। लेकिन मौजूदा वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर यह बताना संभव नहीं है कि भूकंप कब और कहां आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप से जुड़े पैटर्न और गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि किसी खास तारीख या जगह को लेकर किए गए दावों पर तब तक सावधानी से विश्वास करना चाहिए, जब तक वे वैज्ञानिक रूप से साबित न हों। अधिकारी और वैज्ञानिक संस्थाएं लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहतर बिल्डिंग स्टैंडर्ड, आपदा प्रबंधन की तैयारी और जागरूकता सबसे जरूरी उपाय हैं।
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