PM Modi को ‘आतंकवादी’ कहने पर घिरे खरगे, चुनाव आयोग ने 24 घंटे में मांगा जवाब

Published : Apr 22, 2026, 08:33 PM IST
EC Issues Notice to Mallikarjun Kharge Over Controversial Remark on PM Modi

सार

EC Issues Notice to Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम मोदी पर विवादित बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। बीजेपी ने की सख्त कार्रवाई की मांग, जानें पूरा मामला।

चुनावी मौसम में बयानबाजी का तापमान अक्सर बढ़ जाता है, लेकिन इस बार मामला सीधे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़ गया है। मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी ने सियासी हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। अब भारत निर्वाचन आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।

चुनाव आयोग का सख्त रुख

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी माहौल में इस तरह की भाषा आचार संहिता और राजनीतिक मर्यादा के दायरे में नहीं आती। आयोग ने खरगे से उनके बयान पर स्पष्टीकरण देने को कहा है, जिससे यह साफ है कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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बीजेपी का दबाव और प्रतिनिधिमंडल की शिकायत

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत तीन वरिष्ठ मंत्री शामिल थे। सीतारमण ने आयोग से मुलाकात के बाद कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ नेता द्वारा इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लेकर ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री की नीतियां लोगों को “आतंकित” करती हैं, न कि उन्होंने सीधे तौर पर उन्हें आतंकवादी कहा।

इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे न केवल निंदनीय बताया, बल्कि कांग्रेस की सोच का प्रतिबिंब भी करार दिया। पात्रा ने आरोप लगाया कि यह कोई “जुबान फिसलने” का मामला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें लगातार प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राजनीतिक शिष्टाचार पर फिर उठे सवाल

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश के कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से न केवल चुनावी माहौल प्रभावित होता है, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गुणवत्ता भी गिरती है। अब सबकी नजरें भारत निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। खरगे के जवाब के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि क्या कोई कार्रवाई की जरूरत है या नहीं। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है, खासकर तब जब चुनावी माहौल अपने चरम पर हो।

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