Faruk Patel: ऑटो चलाया, Pizza Hut में नौकरी की, ट्रक से ईंटें ढोईं...फिर कैसे खड़ा किया ₹10,964 करोड़ का साम्राज्य?

Published : Oct 03, 2026, 04:21 PM IST

बस कंडक्टर के बेटे ने ऑटो चलाया, Pizza Hut में नौकरी की और फिर ₹1 लाख से कारोबार शुरू किया। पहला बिजनेस छोड़ा, Telecom से Solar की ओर मुड़े और खड़ा किया बड़ा बिजनेस। आखिर कौन से फैसले बने Faruk Patel की कामयाबी की वजह? 6 PHOTOS में देखें सफर।

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Faruk Patel Story: ₹1 लाख से शुरू हुआ सफर

Faruk Patel Success Story: सपनों को सच करने की जिद इंसान से क्या कुछ नहीं करवाती! कभी ऑटो चलाने और पिज़्ज़ा हट में नौकरी करने वाले एक आम युवक ने आज अपनी मेहनत के दम पर 10,964 करोड़ रुपये का विशाल बिजनेस साम्राज्य खड़ा कर दिया है। यह प्रेरणादायक कहानी है केपी ग्रुप (KP Group) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. फारुक जी पटेल की। गुजरात के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले फारुक पटेल का यह सफर इस बात की मिसाल है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो जीरो से भी शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

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संघर्ष के शुरुआती दिन और कड़े इम्तिहान

फारुक पटेल का जन्म 24 मार्च 1972 को गुजरात के भरूच जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक बस कंडक्टर थे, इसलिए घर में आर्थिक तंगी हमेशा बनी रही। कम उम्र में ही उन्होंने पैसे और मेहनत की कीमत को समझ लिया था। जीवन में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए-कभी ऑप्टिकल शॉप पर बैठे, तो कभी ऑटो-रिक्शा चलाया।

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बेहतर भविष्य की तलाश में चले गए थे यूके

बेहतर भविष्य की तलाश में वह साल 1991 में यूके (UK) चले गए, जहां उन्होंने पिज़्ज़ा हट में टीम लीडर के रूप में काम किया। विदेश की सुख-सुविधाओं और अच्छी नौकरी के बावजूद उनका मन भारत में ही बसा था। वह कुछ बड़ा करना चाहते थे, इसलिए 1993 में वापस स्वदेश लौट आए और मात्र 1 लाख रुपये की छोटी सी पूंजी के साथ बिजनेस की दुनिया में कदम रखा।

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जब खुद ट्रक चलाकर ढोईं ईंटें और आधी रात तक किया काम

शुरुआती दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थे। एक बार हजीरा इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए माल की डिलीवरी होनी थी, लेकिन जब ट्रक ड्राइवर और मजदूर मौके पर नहीं पहुंचे, तो फारुक पटेल ने खुद कमान संभालने का फैसला किया। उन्होंने खुद ट्रक चलाया, ईंटें पहुंचाईं और आधी रात तक उन्हें अनलोड करने का काम किया। उस वक्त उनके कपड़े धूल से लाल हो चुके थे और शरीर पर चोट के निशान थे, लेकिन उनका कमिटमेंट अडिग था। हालांकि, कुछ महीनों बाद उन्हें अहसास हुआ कि यह बिजनेस मॉडल उनकी सोच के मुताबिक नहीं है, तो उन्होंने बिना झिझक के उसे बदलकर नए रास्ते की तलाश शुरू कर दी।

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टेलीकॉम से लेकर सोलर सेक्टर का जुआ और ऐतिहासिक सफलता

ट्रांसपोर्ट के बाद उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर में हाथ आजमाया और 13 साल तक देश के 16 राज्यों में मोबाइल टावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया। लेकिन 2G विवाद के झटके के बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उतरने का जोखिम उठाया। उस दौर में उनके दोस्तों और रिश्तेदारों ने उनका जमकर मजाक उड़ाया और इसे भविष्य के साथ जुआ बताया। इस भारी मानसिक दबाव और तनाव के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी।

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आज तीन-तीन कंपनियों के मालिक हैं डा. फारुख

आज उनकी मेहनत रंग लाई है। केपी ग्रुप के पास केपीआई ग्रीन एनर्जी, केपी एनर्जी और केपी ग्रीन इंजीनियरिंग जैसी तीन दिग्गज लिस्टेड कंपनियां हैं। कंपनी का रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो 9.2 गीगावाट से ज्यादा का हो चुका है और 2030 तक 10 गीगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। फारुक पटेल की यह कहानी साबित करती है कि सही समय पर लिया गया कड़ा फैसला और कभी न हार मानने वाला जज्बा इंसान की तकदीर बदल सकता है।

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Faruk Patel की कहानी में सबसे बड़ा सबक

पटेल की कारोबारी यात्रा में एक पैटर्न साफ दिखाई देता है-एक ही मॉडल से चिपके रहने के बजाय समय के साथ दिशा बदलना। ऑटो चलाने और छोटे लॉजिस्टिक्स कारोबार से लेकर टेलीकॉम और फिर रिन्यूएबल एनर्जी तक उनका सफर कई मोड़ों से गुजरा। युवा उद्यमियों के लिए उनका संदेश है-शुरुआत छोटी करें, लेकिन सोच बड़ी रखें। उनके मामले में शुरुआत करीब ₹1 लाख, एक छोटे ऑफिस और कुछ ट्रकों से हुई थी। तीन दशक से ज्यादा समय बाद KP Group तीन लिस्टेड कंपनियों और 10 GW से अधिक रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

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