क्या है गोरखा मुद्दा? प्रचार के आखिरी दिन जिसे 6 महीने में हल करने का वादा कर गए अमित शाह

Published : Apr 21, 2026, 02:26 PM IST

West Bengal Politics: अमित शाह ने दार्जिलिंग रैली में मंगलवार को गोरखा मुद्दा 6 महीने में हल करने का वादा किया। BJP ने गोरखालैंड समाधान, UCC, रोजगार व सुरक्षा जैसे 15 वादे किए। ममता सरकार पर भ्रष्टाचार-बेरोजगारी के आरोप, दार्जिलिंग राजनीति तेज।

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West Bengal Gorkha Issue: दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग में मंगलवार, 21 अप्रैल को हुई एक चुनावी रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोरखा समुदाय को बड़ा राजनीतिक आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आती है, तो दशकों पुराना गोरखा मुद्दा छह महीने के भीतर सुलझा दिया जाएगा। हालांकि शाह ने अपने संबोधन में ‘गोरखालैंड’ या पूर्ण राज्य की मांग का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका संदेश उत्तरी बंगाल के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से चली आ रही पहचान और प्रशासनिक असंतोष की राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है।

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दशकों पुराना सवाल: क्या 6 महीने में संभव है राजनीतिक समाधान?

गोरखा मुद्दा दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में अलग प्रशासनिक पहचान या राज्य की मांग से जुड़ा रहा है। वर्षों से चले आ रहे आंदोलनों, समझौतों और असंतोष के बीच यह मुद्दा लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। शाह ने दावा किया कि BJP ही वह पार्टी है जो गोरखा समुदाय की आकांक्षाओं को वास्तविक समाधान में बदल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी गोरखाओं की शर्तों और भावनाओं के अनुरूप समाधान की दिशा में काम करेगी।

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 ‘विकास बनाम पहचान’ की राजनीति तेज: ममता बनर्जी पर तीखा हमला

अपने भाषण में अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विकास और रोजगार के मुद्दों की बजाय राजनीतिक प्राथमिकताओं पर अधिक केंद्रित है। शाह के अनुसार, बंगाल में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार कई बार संवाद की कोशिश कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं मिला।

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BJP का चुनावी एजेंडा: 15 बड़े वादे

BJP के संकल्प पत्र में कुल 15 प्रमुख वादों का उल्लेख किया गया है। इनमें घुसपैठ पर सख्त कार्रवाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग का शीघ्र कार्यान्वयन, महिलाओं और युवाओं के लिए वित्तीय सहायता और सरकारी नौकरियों में आरक्षण जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार बनने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का भी वादा किया गया है, जिसे पार्टी अपने वैचारिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।

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क्या गोरखा मतदाता बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?

दार्जिलिंग क्षेत्र में BJP पिछले कई चुनावों से मजबूत स्थिति में रही है, लेकिन गोरखा पहचान और स्थानीय आकांक्षाओं को लेकर असंतोष अब भी बना हुआ है। इस बार मुकाबला केवल विकास बनाम सत्ता का नहीं, बल्कि विश्वास और पहचान की राजनीति का भी माना जा रहा है। शाह का छह महीने वाला वादा अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। विपक्ष इसे चुनावी घोषणा बता रहा है, जबकि BJP इसे समाधान की दिशा में निर्णायक कदम के रूप में पेश कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या यह वादा जमीन पर उतर पाएगा या एक और राजनीतिक आश्वासन बनकर रह जाएगा-जिसका जवाब आने वाले चुनावी समीकरण तय करेंगे।

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