Operation Midnight Hammer: सीज़फ़ायर डेडलाइन से पहले ईरान का न्यूक्लियर ढांचा तबाह-ट्रंप का दावा

Published : Apr 21, 2026, 11:46 AM IST

डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल सीज़फ़ायर डेडलाइन से पहले ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों के पूर्ण विनाश का दावा किया। ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट और इस्लामाबाद वार्ता के बीच क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ी।

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Trump Operation Midnight Hammer: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए सोशल मीडिया संदेश में ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बेहद तीखा दावा किया है। ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के तहत ईरान के संवेदनशील न्यूक्लियर ठिकानों को “पूरी तरह और पूर्ण रूप से नष्ट” कर दिया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब इन ठिकानों को फिर से सक्रिय करना “लंबा और कठिन कार्य” होगा। ट्रंप ने अपने पोस्ट में अमेरिकी पायलटों की सराहना करते हुए मीडिया पर भी हमला बोला और CNN सहित प्रमुख समाचार संस्थानों को “भ्रष्ट और पक्षपाती” करार दिया।

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सीज़फ़ायर डेडलाइन से ठीक पहले बढ़ा तनाव

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी सीज़फ़ायर की 22 अप्रैल की समयसीमा बेहद करीब है। इस डेडलाइन से ठीक पहले आए ट्रंप के बयान ने कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सीज़फ़ायर समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता और कई अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों के बाद संभव हुआ था। हालांकि, अब इसकी निरंतरता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ और गुप्त सैन्य कार्रवाई के दावे

ट्रंप प्रशासन के अनुसार, ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल करते हुए ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर ठिकानों-फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फ़हान—पर सटीक हमले किए गए थे। दावा है कि इन हमलों ने ईरान की परमाणु क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके रणनीतिक ढांचे पर प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

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ईरान की सख्त प्रतिक्रिया और संघर्ष जारी रखने का संकेत

ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिका को “आक्रामक शक्ति” बताते हुए किसी भी एकतरफा सीज़फ़ायर को स्वीकार करने से इनकार किया है। तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनके क्षेत्रीय हित सुरक्षित नहीं रहते, तो वह संघर्ष जारी रखेगा। इसके साथ ही, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर भी कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा संकट का संभावित केंद्र

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह रणनीतिक जलमार्ग बाधित होता है, तो दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। पहले से तनावपूर्ण स्थिति में यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

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इस्लामाबाद वार्ता पर अनिश्चितता के बादल

सीज़फ़ायर के अगले चरण को लेकर इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है, लेकिन ईरान ने अभी तक अपनी भागीदारी को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष फिर से तेज होने की आशंका को जन्म दे रहा है।

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