
नोएडाः गरीबी और परिवार का साथ न मिलने पर छोटे बच्चे किस दर्दनाक स्थिति में पहुंच सकते हैं, ग्रेटर नोएडा की यह घटना इसका सबूत है। उस 10 साल की बच्ची का पिता परिवार को छोड़कर चला गया था और मां मानसिक रूप से बीमार थी। इसलिए किसी ने उसे पेट पालने के लिए एक बच्चे की देखभाल करने शहर भेज दिया था। 10 साल की उस बच्ची की देखभाल तो किसी और को करनी चाहिए थी, लेकिन किस्मत उसे पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा ले आई, जहां वह CRPF में काम करने वाले एक व्यक्ति के छोटे बच्चे की देखभाल करने लगी। लेकिन उस दंपति ने बच्ची पर बहुत ज़ुल्म किए, उसे ठीक से खाना नहीं दिया, भूखा रखा और बेरहमी से पीटा। उसका सिर दीवार से टकराया गया। इस भयानक मारपीट से अब उसकी पसलियां टूट गई हैं और वह अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। उसे खाना न देने के कारण उसका हीमोग्लोबिन लेवल 1.9 तक गिर गया है।
छोटी बच्ची से मारपीट के इस मामले में CRPF जवान तारिक अनवर और उसकी पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गंभीर रूप से घायल बच्ची पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की रहने वाली है। उसके छह भाई-बहन हैं और वह घर में सबसे बड़ी है। पिछले साल उसके पिता ने परिवार छोड़कर दूसरी शादी कर ली थी और मां मानसिक रूप से बीमार हो गई, जिससे पूरे परिवार की जिम्मेदारी उस पर आ गई। करीब 40 दिन पहले ही वह CRPF जवान के घर घरेलू सहायिका के तौर पर आई थी। उसका काम CRPF जवान तारिक अनवर के दो छोटे बच्चों की देखभाल करना था। लेकिन 14 जनवरी को घर के काम को लेकर तारिक अनवर और उसकी पत्नी ने उसके साथ मारपीट की।
मारपीट के कारण जब बच्ची बेहोश होकर गिर गई और खून बहने लगा, तो दंपति उसे ग्रेटर नोएडा के सर्वोदय अस्पताल ले गए। उन्होंने डॉक्टरों को बताया कि वह बाथरूम में फिसल गई थी। लेकिन डॉक्टरों को शक हुआ और उन्होंने मेडिकल-लीगल रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद यह घटना सामने आई। मेडिकल जांच में उसके शरीर पर पुराने और नए दोनों तरह के घाव थे। पैरों में सूजन, आंखों के नीचे काले घेरे और गंभीर कुपोषण के लक्षण भी बच्ची में पाए गए। बच्ची की हालत और बिगड़ने पर उसे नोएडा के सेक्टर 128 स्थित मैक्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
घटना के बाद पुलिस ने CRPF जवान तारिक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून को गिरफ्तार कर लिया है। गरीबी के कारण दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे उस बच्ची के परिवार ने सोचा था कि शहर जाकर कम से कम बच्चों को भरपेट खाना तो मिलेगा। लेकिन विडंबना देखिए, उस बच्ची को खाना तो दूर, अब ठीक से सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
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