
गुजरात की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित कर दिया है। मंगलवार को आए स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में BJP ने सभी 15 नगर निगमों पर शानदार जीत दर्ज करते हुए विपक्ष को बड़ा झटका दिया। विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस बड़े चुनावी मुकाबले को राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा था।
नगर निगमों से लेकर जिला पंचायत और तालुका पंचायतों तक, भाजपा ने शहरी और ग्रामीण—दोनों क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपनी संगठनात्मक ताकत का परिचय दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) इस चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। करीब 4.18 करोड़ मतदाताओं और 9,200 से अधिक सीटों वाले इस चुनाव को गुजरात के सबसे बड़े स्थानीय चुनावी अभ्यासों में गिना जा रहा है।
रविवार को 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाएं, 34 जिला पंचायत और 260 तालुका पंचायतों के लिए मतदान हुआ था। मंगलवार को नतीजे सामने आए, जिनमें भाजपा ने सभी 15 नगर निगमों में जीत दर्ज की। अहमदाबाद में BJP ने 192 में से 158 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं सूरत में पार्टी ने 115 सीटें जीतकर विपक्ष को लगभग साफ कर दिया। यहां AAP को केवल 4 और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली। राजकोट में भाजपा ने 72 में से 65 सीटें जीतीं, जबकि वडोदरा में 76 में से 69 सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि शहरी गुजरात में भाजपा की पकड़ अब भी बेहद मजबूत बनी हुई है।
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सिर्फ नगर निगम ही नहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। 34 जिला पंचायतों की कुल 1,090 सीटों में से BJP ने 568 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस को 77 सीटें और अन्य उम्मीदवारों को 30 सीटें मिलीं। 260 तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों में भाजपा ने 2,397 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को यहां 591 सीटें मिलीं, जबकि अन्य उम्मीदवारों ने 329 सीटों पर जीत हासिल की। यह प्रदर्शन दिखाता है कि भाजपा का प्रभाव केवल शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों तक गहराई से फैला हुआ है।
इस बार चुनाव की एक खास बात यह भी रही कि 9 नए नगर निगमों में पहली बार मतदान हुआ। इनमें नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नडियाद, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर शामिल हैं। इन नए नगर निगमों में भी भाजपा ने मजबूत बढ़त बनाकर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। यह परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
यह चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के संशोधित नियमों के तहत कराए गए। इसके चलते कई जिलों में वार्डों का परिसीमन और पुनर्गठन किया गया था। नई व्यवस्था के कारण चुनावी रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। BJP, कांग्रेस और AAP मुख्य मुकाबले में थीं, जबकि AIMIM ने भी कई क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद भाजपा ने व्यापक स्तर पर बढ़त बनाकर स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन और बूथ स्तर की मजबूती उसके लिए सबसे बड़ा हथियार बनी हुई है।
अगले वर्ष होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को भाजपा के लिए बड़े मनोबल के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर जनता के मूड का संकेत माने जाते हैं। ऐसे में 15 की 15 नगर निगमों पर जीत भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस और AAP के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गए हैं। गुजरात की राजनीति में यह जीत सिर्फ स्थानीय निकायों की सफलता नहीं, बल्कि 2027 की बड़ी चुनावी लड़ाई से पहले भाजपा की मजबूत तैयारी का संकेत भी मानी जा रही है।
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