
इंडोनेशिया के एक डेकेयर सेंटर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां योग्यकार्ता में पुलिस ने एक डेकेयर पर छापा मारा, जहां दर्जनों छोटे बच्चों के साथ कथित तौर पर बुरा बर्ताव किया जा रहा था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि यह जांच 'लिटिल अरेषा' नाम के एक क्रेच (बच्चों की देखभाल का सेंटर) पर चल रही है, जहां दो साल से भी कम उम्र के कई बच्चों को कथित तौर पर बांधकर रखा जाता था और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। इस मामले में सेंटर की प्रिंसिपल, फाउंडेशन के अध्यक्ष और देखभाल करने वालों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब वहां काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब उन्होंने सेंटर पर छापा मारा, तो उन्होंने बच्चों को हाथ-पैर बंधे हुए पाया। कुछ बच्चों के शरीर पर चोट के निशान भी साफ दिख रहे थे। इसके अलावा, जांच करने वालों ने पाया कि तीन मीटर चौड़े छोटे-छोटे कमरों में एक साथ 20 बच्चों तक को रखा जाता था। अधिकारियों के मुताबिक, सेंटर में रजिस्टर्ड 103 बच्चों में से कम से कम 53 बच्चों के शोषण या लापरवाही का शिकार होने की आशंका है।
कई माता-पिता ने बताया कि उन्होंने पहले भी अपने बच्चों के शरीर पर बिना किसी वजह के चोट और खरोंच के निशान देखे थे, लेकिन स्टाफ ने हमेशा यही कहकर टाल दिया कि बच्चों ने खेलते हुए खुद को चोट पहुंचाई है। कुछ पेरेंट्स ने यह भी शिकायत की कि दिनभर डेकेयर में रहने के बावजूद उनके बच्चे घर आकर बहुत ज्यादा भूखे रहते थे।
अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह डेकेयर बिना किसी परमिट के चल रहा था और इसे अब बंद कर दिया गया है। स्थानीय सरकार ने प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक और मेडिकल मदद देने की बात कही है।
इस मामले ने इंडोनेशिया में चाइल्डकेयर से जुड़े कानूनों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। 'इंडोनेशियन चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन' का अनुमान है कि देश में 3,000 से ज्यादा चाइल्डकेयर सेंटर हैं, जिनमें से कई के पास जरूरी लाइसेंस भी नहीं हैं। एक राजनेता ने इन आरोपों को "बिल्कुल माफ न करने लायक" बताया है। इस घटना के बाद सख्त निगरानी की मांग बढ़ रही है और अधिकारियों ने कहा है कि अब दूसरे सेंटरों की भी जांच तेज की जाएगी।
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