
Haridwar Snake Incident: उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल हरिद्वार के एक शांत गांव में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक परिवार ने रोज़मर्रा की तरह अपने घर की छत पर रखी पानी की टंकी को साफ़ करने या पानी चेक करने के लिए खोला। टंकी का ढक्कन हटते ही जो खौफनाक नज़ारा सामने था, उसने पूरे परिवार के खून को मानो बर्फ कर दिया। जिसे वे अब तक पीने और नहाने का साफ़ पानी समझ रहे थे, उस टंकी के भीतर एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 27 सांप के बच्चे रेंग रहे थे। हरिद्वार जिले के सराय गांव की इस अजीब और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने न सिर्फ उस परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे इलाके में एक अनजाना डर पैदा कर दिया है।
यह घटना सराय गांव के एक आम दिन की है। घर के सदस्यों को पिछले कुछ समय से पानी की सप्लाई और टंकी के भीतर कुछ अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी। शुरुआत में इसे मामूली कचरा या पानी का दबाव माना गया, लेकिन जब शक गहराया तो घर का एक सदस्य टंकी के पास पहुँचा। जैसे ही उसने टॉर्च की रोशनी टंकी के भीतर डाली, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंधेरे पानी के बीच दर्जनों छोटे-छोटे ज़हरीले सरीसृप एक-दूसरे के ऊपर रेंग रहे थे। घर में सांप मिलने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे सराय गांव में फैल गई। देखते ही देखते उस घर के बाहर ग्रामीणों का भारी हुजूम जमा हो गया, जो इस रहस्यमयी और डरावने मंज़र को अपनी आँखों से देखना चाहते थे।
Haridwar : Large number of snakes recovered from a water tank. pic.twitter.com/9vIgr4en6c
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 9, 2026
टंकी में इतनी बड़ी तादाद में सांपों की मौजूदगी ने घर के भीतर घबराहट और दहशत का माहौल बना दिया था। परिवार ने तुरंत बिना वक्त गंवाए स्थानीय वन विभाग को इस आपदा की सूचना दी। मामले की गंभीरता और खतरे को देखते हुए रेंज ऑफिसर शिशपाल सिंह ने तुरंत इलाके के दो सबसे अनुभवी सांप पकड़ने वाले जांबाजों-तालिब और भोला को रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर भेजा।
टंकी के संकरे मुहाने से 27 फुर्तीले और ज़हरीले सांप के बच्चों को बिना चोट पहुँचाए बाहर निकालना किसी मिशन इम्पॉसिबल से कम नहीं था। रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बेहद सावधानी से एक-एक करके सांप के बच्चों को विशेष उपकरणों की मदद से बाहर निकालना शुरू किया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने कुल 27 सांप के बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया, जिसके बाद उन्हें आबादी से दूर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर भारत में सांपों के निकलने और उनसे जुड़ी सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अक्सर देखा जाता है कि घरों में सांप निकलने या उनके काटने पर लोग समय पर अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और अंधविश्वास का सहारा लेते हैं, जिससे असमय मौतें होती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतने दिनों तक टंकी में सांपों के रहने से पानी के दूषित होने और इन्फेक्शन फैलने का भी गंभीर खतरा था, जो समय रहते टल गया।
हाल ही में देश के कुछ हिस्सों से ऐसी विचलित करने वाली खबरें भी आई हैं जहां मिड-डे मील या गर्भवती महिलाओं के राशन पैकेट में मरे हुए सांप के बच्चे मिले हैं। ऐसे में हरिद्वार की इस घटना ने लोगों को अपने घरों के वॉटर टैंक और खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क रहने की चेतावनी दी है। फिलहाल, सराय गांव के इस परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में सांप टंकी के भीतर पहुंचे कैसे?
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