India Pakistan Tension: आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि पानी पाकिस्तान के लिए एक 'रेड लाइन' है और इस पर किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई के गंभीर नतीजे होंगे.

Indus Water Treaty: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत को सिंधु जल संधि के मुद्दे पर चेतावनी दी है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में शरीफ ने संधि को पाकिस्तान के लिए ‘रेड लाइन’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, वरना पाकिस्तान की ओर से ‘सीधा जवाब’ दिया जाएगा।

हालांकि, भारत के खिलाफ सख्त बयानबाजी के बीच पाकिस्तान खुद कई गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। आतंकवाद, बलूचिस्तान में असंतोष, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में विरोध और इमरान खान की जेल ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Indus Water Treaty: भारत-पाकिस्तान में फिर बढ़ा तनाव

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत का कहना है कि संधि के समय जो परिस्थितियां थीं, वे अब बदल चुकी हैं।

नई दिल्ली ने पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई की मांग की है। भारत का रुख है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक संधि अपने पुराने स्वरूप में आगे नहीं बढ़ सकती।

Shahbaz Sharif ने कहा- पानी हमारी ‘रेड लाइन’

शहबाज शरीफ ने भारत पर शांति का दुश्मन होने का आरोप लगाया। पाकिस्तान प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से रोककर गलत किया है।

शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के पानी की ‘हर बूंद’ उसके लिए रेड लाइन है और इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच पानी और आतंकवाद को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।

Balochistan में ‘Black Day’ की अपील

एक तरफ पाकिस्तान भारत को चेतावनी दे रहा है, वहीं देश के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है। बलूचिस्तान में राष्ट्रवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के बजाय ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाने की अपील की है।

बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस्लामाबाद क्षेत्र में सैन्य दमन कर रहा है। सुराब इलाके में कथित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन घटनाओं में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नागरिक इलाकों में कथित सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन कार्रवाइयों में आम नागरिक, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, प्रभावित हुए हैं।

Khyber Pakhtunkhwa में आतंकवाद बड़ी चुनौती

पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खैबर पख्तूनख्वा के स्वात में काबल पुलिस स्टेशन के पास आत्मघाती हमले में 17 लोगों की मौत और 27 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। मृतकों में पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए।

यह घटना उस समय हुई जब इलाके में खराब कानून-व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। इससे पाकिस्तान सरकार के सामने आतंकवाद पर नियंत्रण का सवाल फिर खड़ा हो गया है।

PoJK में विरोध, Imran Khan की जेल से भी दबाव

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भी राजनीतिक असंतोष जारी है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। संगठन ने सुरक्षा बलों पर बल प्रयोग के आरोप भी लगाए हैं।

इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौजूदगी पाकिस्तान के राजनीतिक संकट को और गहरा कर रही है। उनके परिवार और समर्थक लगातार उनकी स्थिति और मुलाकातों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

ऐसे में भारत को पानी पर कड़ी चेतावनी देने वाले पाकिस्तान के सामने अपने ही देश में सुरक्षा, राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय असंतोष जैसी कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।