सावरकर मानहानि केस में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! शिकायत और समन क्यों हुए रद्द? देश की शीर्ष अदालत ने सरकारी मंजूरी को लेकर ऐसा क्या कहा कि पूरा मामला ही खत्म हो गया और किस बड़ी कानूनी चूक के कारण अचानक पलट गई पूरी बाजी?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक कानूनी मामले में बहुत बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर दिए गए विवादित बयान के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत और लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में अभियोजन के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी मौजूद नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? मंजूरी के बिना मुकदमा नहीं
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे मुख्य आधार कानूनी प्रक्रिया का पालन न होना बना। जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा:
- जब किसी मामले में कानून के तहत सरकारी मंजूरी की अनिवार्य जरूरत होती है और वह नहीं मिलती, तो मामला वहीं समाप्त हो जाता है।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में राहुल गांधी पर मुकदमा चलाने की आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं दी थी।
- अदालत ने साफ किया कि कानून का पालन अनिवार्य है और मंजूरी के अभाव में यह केस टिक नहीं सकता।
विवाद की जड़: रैली में सावरकर पर दी गई टिप्पणी
यह पूरा कानूनी विवाद राहुल गांधी द्वारा एक राजनीतिक रैली के दौरान वीर सावरकर को लेकर दी गई टिप्पणियों से शुरू हुआ था:
- शिकायतकर्ता वकील नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का नौकर बताया और कहा कि उन्हें पेंशन मिलती थी।
- शिकायत में दावा किया गया था कि इन टिप्पणियों से समाज में नफरत, दुर्भावना और वैमनस्य फैलाने की कोशिश की गई।
लखनऊ की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेता को समन जारी किया था, जिसे राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
SC ने क्यों खत्म किया पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने अब शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन, दोनों को रद्द कर दिया। अदालत की टिप्पणी का मुख्य आधार अभियोजन के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी का अभाव रहा। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता से कहा कि कानून में मंजूरी जरूरी है तो उसका पालन करना होगा।
UP सरकार ने क्या कहा था? और हाई कोर्ट का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर याचिका खारिज करने की मांग की थी। राज्य सरकार का तर्क था कि जांच में जानबूझकर नफरत और दुश्मनी फैलाने के आरोप सही पाए गए हैं। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अंततः सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी को आधार बनाते हुए शिकायत और समन दोनों को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
पहले भी SC ने लगाई थी फटकार
गौरतलब है कि पिछले साल 25 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आपराधिक कार्यवाही और ट्रायल कोर्ट के समन पर रोक लगाई थी। उस दौरान अदालत ने राहुल गांधी को उनकी टिप्पणी को लेकर फटकार भी लगाई थी। ताजा फैसले के साथ सावरकर मानहानि मामले में राहुल गांधी को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।


