चीते के साथ होली खेल रहे हैं बिहार के लड़के? वायरल वीडियो का असली सच क्या है?

Published : Mar 03, 2026, 01:15 PM IST

Holi with a Cheetah in Bihar: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा बिहार में होली खेलते युवकों द्वारा चीते को रंग लगाने का वीडियो असली नहीं है। जांच में सामने आया कि यह AI जनरेटेड क्लिप है। जानिए कैसे पहचानें फर्जी वीडियो और क्या है इसकी पूरी सच्चाई।

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होली में ‘चीते’ को रंग लगाते लड़के?

आज के समय में अगर आप सोशल मीडिया पर थोड़ा भी एक्टिव हैं तो AI का नाम जरूर सुना होगा। हर दिन इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर AI से बने वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें कुछ वीडियो इतने असली लगते हैं कि पहली नजर में पहचान पाना मुश्किल हो जाता है।

इसी बीच एक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बिहार में होली के दौरान कुछ युवक खुलेआम एक चीते को रंग लगा रहे हैं। लेकिन जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो कहानी कुछ और ही निकली।

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वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

वीडियो में कुछ लड़के होली खेलते नजर आते हैं। उनके सामने एक चीता खड़ा है और वे उसे रंग लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि चीता बिल्कुल शांत खड़ा दिखाई देता है। न तो वह हमला करता है और न ही भागने की कोशिश करता है। सोचिए, अगर सच में किसी के सामने अचानक जंगली जानवर आ जाए तो क्या कोई इतनी सहजता से उसके पास जाकर रंग लगाएगा? यही बात इस वीडियो को संदिग्ध बनाती है।

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जांच में क्या सामने आया?

यह वीडियो एक्स प्लेटफॉर्म पर @MeenaRamesh91 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया। पोस्ट के कैप्शन में साफ लिखा गया कि यह वीडियो AI जनरेटेड और फर्जी है। कुछ यूजर्स ने इस वीडियो को लेकर एआई चैटबॉट Grok से भी सवाल किया। जवाब में Grok ने भी इसे AI से तैयार किया गया कंटेंट बताया। वीडियो को ध्यान से देखने पर कई संकेत मिलते हैं-

  • चीते की बॉडी मूवमेंट असामान्य लगती है।
  • लड़कों और जानवर के बीच की दूरी और शैडो मेल नहीं खाते।
  • बैकग्राउंड में हल्की ब्लरिंग और टेक्सचर गड़बड़ी दिखाई देती है।

ये सभी संकेत बताते हैं कि वीडियो असली घटना नहीं बल्कि डिजिटल तकनीक से तैयार किया गया है।

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क्यों खतरनाक हो सकते हैं ऐसे AI वीडियो?

AI तकनीक अपने आप में बुरी नहीं है। यह फिल्मों, शिक्षा और क्रिएटिव इंडस्ट्री में काफी काम आ रही है। लेकिन जब इसी तकनीक का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने के लिए होता है, तो यह भ्रम पैदा कर सकता है। इस तरह के वीडियो से

  • किसी राज्य या समुदाय की गलत छवि बन सकती है
  • वन्यजीव सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर गलत संदेश जा सकता है
  • लोग बिना जांच किए वीडियो को सच मान लेते हैं

यही वजह है कि एक्सपर्ट बार-बार सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें।

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कैसे पहचानें AI से बना वीडियो?

अगर आप भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, तो इन बातों पर ध्यान दें:

  1. क्या जानवर या इंसान की मूवमेंट असामान्य लग रही है?
  2. क्या लाइट और शैडो सही तरीके से मैच कर रहे हैं?
  3. क्या वीडियो में कोई अजीब सा ग्लिच या डिटेल की कमी है?
  4. क्या पोस्ट करने वाले अकाउंट ने खुद उसे AI या फर्जी बताया है?

इन छोटे-छोटे संकेतों से आप काफी हद तक समझ सकते हैं कि वीडियो असली है या डिजिटल रूप से तैयार किया गया है।

बिहार में होली खेलते युवकों द्वारा चीते को रंग लगाने का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह असली नहीं है। यह AI की मदद से बनाया गया वीडियो है, जिसे कुछ लोग बिना जांच किए शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूक रहना। हर वायरल चीज सच नहीं होती।

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