
Hormuz Strait Crisis: दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, हॉर्मुज स्ट्रेट, इन दिनों वैश्विक संकट का केंद्र बना हुआ है। यहां से दुनिया का करीब 20-25% तेल गुजरता है, लेकिन अब यह रास्ता बंद जैसा हो गया है। वजह चौंकाने वाली है-रिपोर्ट के अनुसार ईरान को अपनी ही बिछाई गई बारूदी सुरंगों का पता नहीं मिल रहा। ऐसे में सवाल उठता है: आखिर यह जलमार्ग कब खुलेगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने युद्ध के दौरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में कई जगह बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं ताकि दुश्मन देशों के जहाजों को रोका जा सके। लेकिन अब जब हालात थोड़े शांत हुए हैं और जहाजों की आवाजाही बढ़ाने का दबाव है, तो ईरान के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि इन सुरंगों का सही लोकेशन डेटा अब उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें हटाना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि वह इस जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर पा रहा।
यह संकरा समुद्री रास्ता खाड़ी देशों को दुनिया से जोड़ता है। यहां से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आ सकता है और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द खोलना जरूरी है। उनका कहना है कि अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। दरअसल, इस जलमार्ग के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे कई देशों में कीमतें बढ़ने लगी हैं। इसलिए अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है कि वह इस रास्ते को खोले।
ईरान अब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है। इसमें जहाजों के लिए एक तरह का “क्लियरेंस सिस्टम” बनाया गया है, जहां उन्हें पहले अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, ईरान ओमान के साथ मिलकर एक नया समुद्री प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके। लेकिन जब तक सुरंगों का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होना मुश्किल है।
ईरान ने जहाजों के लिए कुछ खास रास्ते भी तय किए हैं, ताकि वे सुरक्षित तरीके से गुजर सकें। इन रूट्स में नौसेना की निगरानी भी शामिल है। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे तय रास्तों का ही इस्तेमाल करें और ईरानी नौसेना के निर्देशों का पालन करें। इससे दुर्घटनाओं और हमलों का खतरा कम किया जा सकता है।
ट्रंप का दावा है कि अमेरिका जल्द ही इस जलमार्ग को खुलवाने में सफल होगा, और इसमें अन्य देश भी मदद कर सकते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक ईरान अपनी बिछाई हुई सुरंगों को पूरी तरह हटाने में सफल नहीं होता, तब तक यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इस समय हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन बन चुका है। ईरान की तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियां इस संकट को और जटिल बना रही हैं।
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