
हैदराबाद: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना हर पर्वतारोही का सपना होता है। लेकिन अगर कोई वहां जाकर सुरक्षित वापस न लौट पाए, तो यह परिवार और रेस्क्यू टीम दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ जब हैदराबाद के पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी की चोटी फतह कर नीचे उतरते समय मौत हो गई। अब उनके परिवार ने एक भारी मन से फैसला लिया है कि अरुण का पार्थिव शरीर एवरेस्ट की बर्फीली वादियों में ही रहेगा।
8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट को फतह करने का पूरा सफर करीब 2 महीने का होता है। इस पर 50 लाख से 90 लाख रुपए तक का खर्च आता है। इसमें चढ़ाई की फीस, ट्रेनिंग, शेरपा गाइड का खर्च, जरूरी उपकरण और बीमा जैसी चीजें शामिल होती हैं।
अगर चढ़ाई या उतराई के दौरान किसी की मौत हो जाती है, तो उनके शव को नीचे लाना बहुत ही मुश्किल काम है। इसकी वजह यह है कि हेलीकॉप्टर सिर्फ 6400 मीटर की ऊंचाई तक ही उड़ान भर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति (जिंदा या मृत) इस ऊंचाई पर फंसा है, तो उसे एयरलिफ्ट किया जा सकता है और इसका खर्च बीमा में कवर होता है। लेकिन इससे ऊपर से शव को लाने के लिए अगर शेरपा को जाना पड़े, तो बीमा कंपनी पैसे नहीं देती।
जिन मामलों में हेलीकॉप्टर नहीं जा सकते, वहां शेरपा ही शव को नीचे लाते हैं। लेकिन इस काम के लिए कम से कम 1 करोड़ रुपए या उससे भी ज्यादा का खर्च आता है। अरुण कुमार तिवारी के मामले में भी यही हुआ। उनकी मौत चोटी से सिर्फ 60 मीटर नीचे हुई थी। यहां से शव को लाने के लिए कम से कम 10-12 शेरपाओं की टीम की जरूरत पड़ती। उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर और दूसरे उपकरणों के साथ उस खतरनाक रास्ते पर जाना पड़ता, जिसमें काफी समय लगता। फिर शव को ढूंढकर, रस्सियों से बांधकर नीचे लाना होता। इस इलाके में हर पल हिमस्खलन (बर्फ का तूफान) का खतरा बना रहता है, जो शेरपाओं की जान के लिए भी बड़ा जोखिम है।
इन्हीं वजहों से परिवार ने अरुण के शव को वहीं छोड़ने का फैसला किया। परिवार के मुताबिक, 'अगर हम शव लाने की कोशिश भी करते, तो हम तक पहुंचने तक उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी होती। एक पर्वतारोही होने के नाते तिवारी की भी यही इच्छा थी कि वो हिमालय से जुड़े रहें।'
चढ़ाई के दौरान ही अरुण की तबीयत बिगड़ने लगी थी और उन्हें वापस लौटने की सलाह दी गई थी। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि 'जब चोटी इतनी साफ दिख रही है, तो वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता।' उन्होंने अपनी इच्छा पूरी की और चोटी पर पहुंचे। लेकिन नीचे उतरते समय अचानक उन्हें खून की उल्टियां होने लगीं। उनके साथ मौजूद शेरपाओं ने ऑक्सीजन मास्क की मदद से उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
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