Israel-Iran War: 'ये अच्छाई-बुराई की जंग है', IDF के बेन कोहेन ने बताया ईरान में इजरायल का असली मकसद

Published : Mar 11, 2026, 06:07 PM IST
Israel-Iran War: 'ये अच्छाई-बुराई की जंग है', IDF के बेन कोहेन ने बताया ईरान में इजरायल का असली मकसद

सार

IDF के अनुसार, मिडिल ईस्ट में Israel-Iran संघर्ष के बीच US के साथ सैन्य सहयोग अभूतपूर्व है। इसका लक्ष्य ईरान और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क के खतरे को खत्म करना है। इजरायल ने सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही है।

मिडिल ईस्ट में Israel, Iran और United States के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इसी बीच Israel Defense Forces (IDF) के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता के डिप्टी Ben Cohen ने एक इंटरव्यू में इस युद्ध की स्थिति, अमेरिका-इजरायल के सहयोग और ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क पर विस्तार से बात की।

अमेरिका और इजरायल के बीच गहरा सैन्य सहयोग

बेन कोहेन ने कहा कि इस समय अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य सहयोग पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और गहरा है। उनके मुताबिक दोनों देशों की सेनाएं कई ऑपरेशनों में पहले भी साथ काम कर चुकी हैं, लेकिन इस बार का तालमेल “अभूतपूर्व” है। उन्होंने बताया कि Israeli Air Force और अमेरिकी सेना एक साथ रणनीतिक तरीके से ऑपरेशन चला रही हैं। दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी, सैन्य योजना और हमलों के समन्वय को बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। कोहेन के अनुसार, इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य ईरान से आने वाले उस खतरे को खत्म करना है जिसे इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है।

खुफिया जानकारी बनी बड़ी ताकत

कोहेन ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच खुफिया जानकारी साझा करना इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। इससे दोनों देश एक साथ कई सैन्य लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हो गए हैं। उनके अनुसार, जब दुनिया की दो मजबूत वायु सेनाएं एक ही लक्ष्य के लिए तालमेल के साथ काम करती हैं तो ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी हो जाता है। इस रणनीति के जरिए ईरान की मिसाइल क्षमताओं और सैन्य ढांचे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

ईरान के प्रॉक्सी संगठनों पर आरोप

कोहेन ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने पूरे मिडिल ईस्ट में कई प्रॉक्सी संगठन खड़े किए हैं जो इजरायल के खिलाफ हमले करते हैं। उन्होंने खास तौर पर Hezbollah, Hamas और Houthis का नाम लिया। उनका कहना है कि ये संगठन ईरान से आर्थिक और सैन्य मदद लेते हैं और इजरायल पर हमले करते हैं। उन्होंने कहा कि लेबनान से हाल ही में हुए रॉकेट और ड्रोन हमले भी इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं। कोहेन के अनुसार, इजरायल अपने नागरिकों को लगातार खतरे में नहीं रहने दे सकता। उनका कहना है कि हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है, इसलिए इन खतरों को खत्म करना जरूरी है।

इजरायल के मुताबिक ईरान क्षेत्रीय खतरा

कोहेन ने कहा कि हाल के हमलों ने यह साबित कर दिया है कि ईरान सिर्फ इजरायल ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। उनके मुताबिक ईरान के हमले कई देशों तक फैल चुके हैं और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान नागरिक ठिकानों को भी निशाना बना रहा है और आतंक फैलाने की रणनीति अपना रहा है।

ऑपरेशन जारी रहेगा

जब उनसे पूछा गया कि यह युद्ध कब तक चलेगा, तो कोहेन ने कहा कि इजरायल तब तक अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा जब तक ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर नहीं कर दिया जाता। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया था। अब अभियान अगले चरण में पहुंच गया है, जिसमें ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। कोहेन ने साफ कहा कि इजरायल इस खतरे को पूरी तरह खत्म करना चाहता है ताकि भविष्य में फिर से ऐसा खतरा पैदा न हो सके।

खुफिया ऑपरेशन पर टिप्पणी से इनकार

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस अभियान में CIA और Mossad के बीच सहयोग हुआ है, तो उन्होंने इस पर खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खुफिया जानकारी ऐसे ऑपरेशनों में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन इसके विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।

पूरे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

इस संघर्ष का असर पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई दे रहा है। हाल ही में Dubai के पास ड्रोन गिरने से लोग घायल हुए, Saudi Arabia ने मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया और Doha में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। इसके अलावा Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक इलाके में भी जहाजों पर हमलों की खबरें आई हैं। वहीं Beirut में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर इजरायली हमले जारी हैं, जबकि ईरान ने भी इजरायल की ओर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इन घटनाओं के चलते पूरे क्षेत्र में युद्ध के और ज्यादा फैलने का खतरा बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी चिंता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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