Mizoram Civic Sense Video: ट्रेन को कूड़ेदान बनाने वाला वायरल वीडियो क्या है? मिजोरम के लोगों की इस अच्छी आदत का क्या राज है? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो शेयर कर क्या कहा? एक ही देश में दो अलग-अलग सोच क्यों सिविक सेंस पर सवाल उठा रही है?
Train Littering Viral Video: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि देश को साफ रखना सिर्फ सरकार या सफाई कर्मचारियों का काम है? अगर हां, तो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो आपकी सोच को हमेशा के लिए बदल देगा। इंटरनेट पर एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर एक तरफ तो आपको गुस्सा आएगा, लेकिन दूसरी तरफ गर्व से आपका सीना चौड़ा हो जाएगा। इस वीडियो को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने भी अपने X (ट्विटर) हैंडल पर शेयर किया है और लिखा- 'नॉर्थ ईस्ट के मिजोरम से कुछ सीखिए!' आइए जानते हैं कि आखिर इस वायरल वीडियो में ऐसा क्या है, जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एक ही देश, एक ही ट्रेन, लेकिन सोच में जमीन-आसमान का अंतर
इस वीडियो में दो अलग-अलग नजारे दिखाए गए हैं, जो हमारे समाज का सच बयां करते हैं। वीडियो के एक हिस्से में 10वीं क्लास के कुछ बच्चे दिख रहे हैं, जो मनाली टूर पर जा रहे हैं। नई और चमचमाती ट्रेन में सफर कर रहे इन बच्चों ने कुछ ही घंटों में पूरे डिब्बे का कबाड़खाना बना दिया। नया चार्जिंग पोर्ट हो या फर्श, हर जगह सिर्फ कूड़ा ही कूड़ा नजर आया। जिसे लोग जीरो सिविक सेंस बता रहे हैं। ठीक इसी के उलट, वीडियो के दूसरे हिस्से में मिजोरम के कुछ मुसाफिर नजर आते हैं। वे सफर खत्म होने के बाद अपनी सीट और फर्श पर गिरा एक-एक कचरा खुद उठाकर अपने बैग में डाल रहे हैं। जब वे ट्रेन से उतरे, तो पूरा डिब्बा बिल्कुल शीशे की तरह चमक रहा था।
मिजोरम की संस्कृति में ही दूसरों के बारे में पहले सोचना
आखिर ऐसा क्यों है कि एक तरफ लोग देश की संपत्ति को बर्बाद कर रहे हैं और दूसरी तरफ मिजोरम के लोग उसे अपनी जान से ज्यादा संभाल रहे हैं? इसका जवाब सिर्फ एक शब्द में है, 'तोलमगायना' (Tawlhchhamna)। मिजोरम की भाषा के इस शब्द का खूबसूरत मतलब है कि 'अपने से पहले दूसरों के बारे में सोचना।' इसी सोच की वजह से मिजोरम आज पूरे भारत के लिए एक मिसाल बन चुका है।
मिजोरम से जुड़े 3 ऐसे फैक्ट्स, जो आपका दिल जीत लेंगे
- यहां कई जगहों पर दुकानों में कोई दुकानदार नहीं बैठता। सामान पर रेट लिखे होते हैं, ग्राहक आते हैं, अपनी पसंद का सामान उठाते हैं और डिब्बे में पूरी ईमानदारी से पैसे रखकर चले जाते हैं।
- यहां के बियाते (Biate) इलाके में हर शनिवार की सुबह स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे हाथों में झाड़ू लेकर अपनी गलियों को साफ करने निकल पड़ते हैं। उनके लिए सफाई किसी और का काम नहीं, बल्कि खुद की जिम्मेदारी है।
- जब हम सब 'मैं पहले, मैं पहले' की होड़ में लगे हैं, मिजोरम 'मैं बाद में' के फॉर्मूले पर चलता है। रात के 3 बजे लैंडस्लाइड (मलबे) को हटाना हो या किसी भूखे पड़ोसी की मदद करनी हो, यहां पूरा समाज एक साथ खड़ा हो जाता है।


