IIT दिल्ली और DRDO का कमाल: बनाया अपना 'जासूसी गुब्बारा', अब दुश्मन की खैर नहीं

Published : Jul 01, 2026, 04:01 PM IST
IIT Delhi

सार

Aerostat Technology: IIT दिल्ली ने DRDO और एक स्टार्टअप के साथ मिलकर देश में ही एक सस्ता टैक्टिकल एयरोस्टेट बनाया है। जो 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक निगरानी रखेगा। अब तक भारत ऐसी तकनीक अमेरिका से खरीदता था।

नई दिल्ली : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने बुधवार को देश में बने एक कम लागत वाले टैक्टिकल एयरोस्टेट का प्रदर्शन किया। इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) और एक घरेलू स्टार्टअप के साथ मिलकर बनाया गया है।

IIT-दिल्ली का स्वदेशी एयरोस्टेट तैयार

IIT दिल्ली के प्रोफेसर भूपेन सिंह भटोला ने बताया कि संस्थान ने एक स्वदेशी टैक्टिकल एयरोस्टेट विकसित किया है। यह 20 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर निगरानी और कम्युनिकेशन से जुड़े पेलोड ले जाने में सक्षम है, जिससे आयातित सिस्टम पर देश की निर्भरता कम होगी।

 

20 किमी ऊंचाई तक करेगा निगरानी

  • भटोला ने कहा, "यह एक एयरोस्टेट है, यानी हवा से भी हल्का एक बड़ा गुब्बारा। इसे एक ऊंचा प्लेटफॉर्म कह सकते हैं जिसे 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया जा सकता है। आप इस पर कैमरा, IR डिटेक्टर या कम्युनिकेशन नेटवर्क जैसे पेलोड लगा सकते हैं। इसे ऊंचाई पर ले जाने से यह एक बड़े इलाके को कवर कर सकता है। अब तक इसका इस्तेमाल सिर्फ रक्षा क्षेत्र में होता था और इन्हें अमेरिका से मंगाया जाता था। DRDO इसे भारत में ही बनाना चाहता था और हमने इसके लिए मैटेरियल तैयार करने की दिशा में काम किया। इस प्रोजेक्ट में ट्रेनिंग लेने वाले डॉ. नीरज मांदलेकर ने एक स्टार्टअप शुरू किया और इस मैटेरियल को आकार देने का हुनर विकसित किया। यह IIT-दिल्ली, DRDO और एक स्टार्टअप की मिली-जुली कोशिश है।"
  • उन्होंने कहा कि देश में बना यह टैक्टिकल एयरोस्टेट ड्रोन की तुलना में ज़्यादा देर तक हवा में रह सकता है, भारी पेलोड उठा सकता है और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन में भी मदद कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस टेक्नोलॉजी का आम नागरिक कामों में भी इस्तेमाल होने की काफी संभावना है।
  • भटोला ने आगे कहा, “इस एयरोस्टेट और ड्रोन में दो बड़े अंतर हैं। ड्रोन पावर्ड होता है। ड्रोन की तुलना में यह ज्यादा समय तक हवा में टिका रह सकता है। ये भारी पेलोड ले जा सकते हैं और सामान की सप्लाई भी कर सकते हैं। हमें लगता है कि भविष्य में इसका इस्तेमाल आम नागरिक कामों के लिए भी हो सकता है। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हम ग्राहकों को यह सॉल्यूशन दे सकते हैं।”

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