
श्रीहरिकोटा: शनिवार का दिन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) से जब सात मंजिला ऊंचा एक महाबली रॉकेट आग की भीषण लपटों और बादलों को चीरते हुए आसमान की ओर बढ़ा, तो पूरी दुनिया देखती रह गई। हैदराबाद के स्पेस स्टार्ट-अप 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने अपने पहले ही प्रयास में ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 का सफल लॉन्च करके वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना बड़े-बड़े देश भी नहीं कर सकते। 'मिशन आगमन' की इस अभूतपूर्व सफलता ने भारत को दुनिया के उन गिने-चुने देशों की एलीट लिस्ट में शामिल कर दिया है, जिनके पास स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाली प्राइवेट कंपनियां मौजूद हैं।
लॉन्चिंग के ठीक पहले सतीश धवन स्पेस सेंटर के कंट्रोल रूम में अचानक सन्नाटा पसर गया था। काउंटडाउन के दौरान एक तकनीकी 'इंटरनल होल्ड' (रुकावट) के कारण सांसें थम सी गई थीं। हर किसी के मन में यह डर था कि क्या यह ऐतिहासिक मिशन रुक जाएगा? लेकिन, स्काईरूट के युवा वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी। रुकावट दूर होते ही जैसे ही रॉकेट ने उड़ान भरी, इसके चारों स्टेज ने एक के बाद एक उम्मीद के मुताबिक सटीक ढंग से काम किया। रॉकेट ने न सिर्फ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश किया, बल्कि सैटेलाइट्स को उनकी निर्धारित जगह पर बेहद सफाई से स्थापित भी कर दिया। पहली ही कोशिश में मिली यह शत-प्रतिशत कामयाबी स्पेस ट्रांसपोर्टेशन की दुनिया में भारत की नई बादशाहत की गवाही दे रही है।
करीब सात मंजिला ऊंचा Vikram-1 पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट से तैयार मल्टी-स्टेज लॉन्च व्हीकल है। यह 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने की क्षमता रखता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह इन-हाउस विकसित प्रोपल्शन सिस्टम, 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन और हाई-परफॉर्मेंस सॉलिड मोटर हैं, जो इसे आधुनिक और लागत प्रभावी बनाते हैं।
Skyroot Vikram-1 LIFTOFF from SDSC! pic.twitter.com/pcIXRfRXkZ
— Anshuman Mahapatra (@TitaniumSV5) July 18, 2026
पहली उड़ान केवल तकनीकी परीक्षण नहीं थी। इस मिशन में Grahaa Space, Cosmoserve, DCubed और Skyroot के SCOPE प्रयोग सहित कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड भेजे गए। इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित 'वंदे मातरम्' संदेश, ISRO के वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष यात्रियों और स्काईरूट टीम के संदेश भी प्रतीकात्मक रूप से अंतरिक्ष में भेजे गए।
इस चमत्कारिक सफलता के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद फोन उठाकर स्काईरूट की टीम को बधाई दी। पीएम मोदी ने स्काईरूट के संस्थापकों से बातचीत में कुछ ऐसा कहा जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, "पवन और भरत, आपने न सिर्फ अंतरिक्ष में एक नया पेड़ लगाया है, बल्कि ज़मीन पर भी एक नई जड़ मज़बूत की है जो देश की आने वाली नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।" लगभग सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट पूरी तरह से एडवांस्ड कार्बन कम्पोजिट से बना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3D-printed रॉकेट इंजन और हाई-परफॉर्मेंस सॉलिड रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें पूरी तरह से इन-हाउस (स्वदेशी) तैयार किया गया है।
विक्रम-1 अपने साथ 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ले जाने की ताकत रखता है। इस पहली टेस्ट फ्लाइट में कई हाई-टेक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड भेजे गए, जिनमें Grahaa Space, Cosmoserve, DCubed और स्काईरूट का अपना SCOPE एक्सपेरिमेंट शामिल था। लेकिन इस मिशन में तकनीकी पेलोड्स के अलावा कुछ बेहद भावुक और खास सिंबॉलिक चीजें भी अंतरिक्ष भेजी गईं। रॉकेट के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा हुआ "वंदे मातरम" का एक पोस्टकार्ड रखा गया था। इसके साथ ही ISRO के मौजूदा व पूर्व चेयरमैन, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों और स्काईरूट के निवेशकों के हाथ से लिखे गुप्त संदेशों को भी अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में भेजा गया है, जो भारत की रचनात्मकता और संकल्प को दर्शाते हैं।
इस ऐतिहासिक सफलता की नींव साल 2018 में पड़ी थी, जब ISRO के दो पूर्व वैज्ञानिकों—पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़कर अंतरिक्ष को बदलने का एक सपना देखा था। साल 2020 में जब भारत सरकार ने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला, तब इन दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। साल 2022 में इनके सब-ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-S' ने सिर्फ अंतरिक्ष को छुआ था, लेकिन आज विक्रम-1 ने इतिहास रचते हुए कक्षा में सैटेलाइट स्थापित कर दिए हैं। यह मिशन साबित करता है कि भारत की प्राइवेट इंडस्ट्री अब ग्लोबल स्पेस मार्केट पर कब्जा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
Vikram-1 की सफलता का सबसे बड़ा असर कमर्शियल स्पेस मार्केट पर पड़ेगा। अब छोटे सैटेलाइट ऑपरेटरों को तेज, सस्ता और भरोसेमंद लॉन्च विकल्प मिल सकेगा। इससे भारत वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में मजबूत कदम रखेगा और निजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। यह मिशन केवल एक लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम में उस नए अध्याय की शुरुआत है, जहां सरकारी एजेंसियों के साथ निजी कंपनियां भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।
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