चीनी पनडुब्बी, पाकिस्तानी बेड़ा और INS ऐरावत... हिंद महासागर में क्या पक रही है खिचड़ी?

Published : Jun 04, 2026, 06:43 PM IST
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सार

India and Pakistan Warships Reach Colombo Together: कोलंबो पोर्ट पर भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों का एक साथ पहुंचना क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है? पाकिस्तान की चीनी निर्मित हांगोर पनडुब्बी को लेकर भारत की चिंता की वजह क्या है? हिंद महासागर में भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती समुद्री प्रतिस्पर्धा का श्रीलंका पर क्या असर पड़ सकता है?

दिल्ली, इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच समुद्री रणनीति का खेल एक बार फिर चर्चा में है। हिंद महासागर क्षेत्र में उस समय हलचल बढ़ गई जब भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज एक ही दिन श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचे। सतह पर यह सामान्य नौसैनिक गतिविधि लग सकती है, लेकिन इसके पीछे छिपे रणनीतिक संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब पाकिस्तान के साथ एक चीनी निर्मित अत्याधुनिक पनडुब्बी भी कोलंबो पहुंची हो और उसी समय भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण युद्धपोत भी वहां मौजूद हो।

कोलंबो पोर्ट पर भारत और पाकिस्तान की एक साथ मौजूदगी क्यों अहम है?

1 जून 2026 को भारतीय नौसेना का लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस ऐरावत कोलंबो बंदरगाह पहुंचा। लगभग उसी समय पाकिस्तान नौसेना के युद्धपोत पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात और पनडुब्बी पीएनएस/एम हांगोर भी श्रीलंका पहुंचे। श्रीलंका नौसेना ने दोनों देशों के जहाजों के आगमन की पुष्टि की है। यही वजह है कि रक्षा और रणनीतिक मामलों के जानकार इस घटनाक्रम को सामान्य बंदरगाह यात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

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भारतीय नौसेना का मिशन क्या था?

भारतीय नौसेना के अनुसार आईएनएस ऐरावत का दौरा एक नियमित "ऑपरेशनल टर्नअराउंड" का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ईंधन भरना, रसद सामग्री लेना और सीमित तकनीकी जरूरतों को पूरा करना था। यह जहाज श्रीलंका कोस्ट गार्ड के पोत "सुरक्षा" के लिए आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामग्री भी लेकर पहुंचा। यह कदम भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" और "सागर" (Security and Growth for All in the Region) नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कोलंबो प्रवास के दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर आईपी पाटिल ने श्रीलंकाई नौसेना अधिकारियों से मुलाकात की। दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच पेशेवर, खेल और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भारतीय नौसैनिकों ने "स्वच्छ श्रीलंका" अभियान के तहत समुद्र तट सफाई कार्यक्रम में भी भाग लिया।

पाकिस्तान का नौसैनिक बेड़ा और चीन का बढ़ता प्रभाव

पाकिस्तान की ओर से कोलंबो पहुंचे तीन प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्म में सबसे अधिक चर्चा पीएनएस/एम हांगोर को लेकर है। हैंगोर-क्लास पनडुब्बी चीन की तकनीक पर आधारित है और इसे पाकिस्तान नौसेना की सबसे महत्वपूर्ण नई क्षमताओं में गिना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह पनडुब्बी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें दागने की क्षमता रखती है, जिससे इसकी सामरिक अहमियत और बढ़ जाती है।

पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को "सद्भावना दौरा" और रसद आपूर्ति मिशन बताया है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि हिंद महासागर में चीन-पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक साझेदारी के संदर्भ में इस यात्रा को व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।

भारत क्यों रहता है सतर्क?

भारत लंबे समय से श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीनी सैन्य गतिविधियों को लेकर संवेदनशील रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी है। बीते वर्षों में चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट और अन्य समुद्री परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है। भारतीय रणनीतिक समुदाय इसे अक्सर "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के रूप में देखता है, जिसके तहत चीन हिंद महासागर में रणनीतिक ठिकानों का नेटवर्क विकसित कर रहा है। ऐसे में जब चीन निर्मित पनडुब्बी श्रीलंका पहुंचती है, तो भारत स्वाभाविक रूप से उस पर नजर बनाए रखता है।

श्रीलंका का संतुलन साधने वाला कूटनीतिक खेल

श्रीलंका इस पूरे घटनाक्रम में एक बेहद नाजुक स्थिति में दिखाई देता है। एक तरफ भारत उसका सबसे करीबी पड़ोसी, प्रमुख आर्थिक साझेदार और संकट के समय मददगार देश रहा है। दूसरी तरफ श्रीलंका चीन के बड़े निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी निर्भर है। पाकिस्तान के साथ भी उसके रक्षा और सैन्य संबंध बने हुए हैं। यही वजह है कि कोलंबो दोनों पक्षों के जहाजों को समान रूप से मेजबानी देकर अपनी संतुलित विदेश नीति का संदेश देने की कोशिश कर रहा है।

हिंद महासागर में क्यों बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा?

हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है। इस वजह से भारत, चीन और पाकिस्तान तीनों देश यहां अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना चाहते हैं। चीन जहां अपने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और प्रभाव विस्तार पर काम कर रहा है, वहीं भारत हिंद महासागर को अपने प्राकृतिक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखता है। पाकिस्तान, चीन के सहयोग से अपनी नौसैनिक क्षमता बढ़ाकर इस क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है इस घटनाक्रम का बड़ा संदेश?

भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों का एक ही दिन कोलंबो पहुंचना केवल संयोग नहीं माना जा रहा। यह हिंद महासागर में चल रही उस व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की झलक है, जिसमें चीन भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।

हालांकि दोनों देशों की यात्राओं को आधिकारिक रूप से नियमित नौसैनिक गतिविधि बताया गया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे यह साफ संदेश जाता है कि हिंद महासागर आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है।

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