Tamil Nadu Delimitation: परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु में सियासी घमासान मचा है। सीएम विजय की बैठक में 21 सांसद शामिल हुए, लेकिन दो सबसे बड़े दलों DMK-AIADMK दूर रहें।
Tamil Nadu Delimitation Row: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों परिसीमन (Delimitation) बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने शनिवार को राज्य के सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई। मकसद था कि केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु की तरफ से एकजुट रुख तैयार किया जाए। चेन्नई के कलैवनार अरंगम में हुई इस बैठक में करीब 21 सांसद पहुंचे, लेकिन राज्य की राजनीति के दो बड़े नाम DMK और AIADMK इससे दूर रहे। जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो गए। कहा जा रहा कि जब मामला तमिलनाडु की संसद में राजनीतिक ताकत से जुड़ा है, तो दो बड़े दलों ने विजय की बैठक से दूरी क्यों बनाई?
परिसीमन को लेकर इतना बवाल क्यों है?
परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। आशंका जताई जा रही है कि अगर यह प्रक्रिया पूरी तरह से जनसंख्या के आधार पर हुई, तो उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण भारत के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु की लोकसभा में ताकत घट जाएगी। इस मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने दो टूक कहा है कि संसद में तमिलनाडु की आवाज और उसकी हिस्सेदारी के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य की सीटों का मौजूदा कोटा हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए।
तमिलनाडु की सबसे बड़ी मांग क्या है?
मुख्यमंत्री विजय की बैठक में शामिल सांसदों का कहना था कि तमिलनाडु की मौजूदा संसदीय हिस्सेदारी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के मुताबिक, नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि तमिलनाडु की संसद में मौजूदगी को कम नहीं किया जाना चाहिए। बैठक में एक अहम मांग यह भी रखी गई कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर फ्रीज रखी जाए और तमिलनाडु को 39 सीटों की मौजूदा हिस्सेदारी की गारंटी मिले।
सीएम विजय की बैठक में कौन-कौन पहुंचा?
बैठक का आयोजन कलैवनार अरंगम में किया गया था। इसमें करीब 21 लोकसभा और राज्यसभा सांसद शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML से जुड़े सांसद शामिल थे। बैठक में शामिल नेताओं ने आबादी के आधार पर होने वाले किसी भी ऐसे बदलाव का विरोध करने की बात कही, जिससे तमिलनाडु की संसद में राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है। कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने भी परसीमन को लेकर चिंता जताई और कहा कि इसका असर तमिलनाडु के साथ-साथ देश पर भी पड़ सकता है।
DMK और AIADMK कहां थे?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के 57 सांसदों में से करीब 20 के बैठक में शामिल होने की उम्मीद थी, जबकि बड़ी संख्या में सांसद इससे दूर रहे। सत्तारूढ़ DMK के सभी 30 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। वहीं मुख्य विपक्षी AIADMK के चार सांसद भी शामिल नहीं हुए। इसके अलावा PMK, MNM और DMDK के एक-एक सांसद के भी बैठक से दूर रहने की बात सामने आई। इससे मुख्यमंत्री विजय की बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।
कांग्रेस नेताओं ने DMK-AIADMK पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने DMK और AIADMK के बैठक में शामिल न होने पर निराशा जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि 'जिन दोनों पार्टियों ने लंबे समय तक तमिलनाडु की राजनीति का नेतृत्व किया है, उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई ऐसी बैठक में शामिल होना चाहिए था।' कांग्रेस सांसद विष्णु प्रसाद ने भी दोनों दलों की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि 'अगर परसीमन के बाद तमिलनाडु की संसद में हिस्सेदारी कम होती है तो राज्य की आवाज कमजोर हो सकती है।'


