
दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में गिने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर इस समय तनाव अपने चरम पर है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को हिला कर रख दिया है. हालात ऐसे हैं कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ चुकी है. यही वह रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और बड़ी मात्रा में ऊर्जा सप्लाई गुजरती है. इस संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि कई भारतीय हितों से जुड़े जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहे हैं. हालांकि हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री रास्तों में शामिल है. फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार की रीढ़ माना जाता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों को प्रभावित करता है.
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शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला विशाल क्रूड ऑयल टैंकर “निसोस केरोस” 25-26 मई की रात सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहा. यह जहाज करीब 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा है और इसके 3 जून 2026 तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि जहाज के सभी क्रू मेंबर विदेशी बताए गए हैं, लेकिन भारत सरकार लगातार इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है.
जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर सरकार ने खुलकर ज्यादा जानकारी नहीं दी है. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि ईरान के साथ किस तरह तालमेल बनाया जा रहा है, इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा सकती. हालांकि मंत्रालय ने यह जरूर साफ किया कि पूरा समन्वय विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए किया जा रहा है. कौन सा जहाज पहले निकलेगा और किसे प्राथमिकता दी जाएगी, इसका फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर लिया जा रहा है.
शिपिंग मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस संवेदनशील क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक फिलहाल सुरक्षित हैं. किसी भी भारतीय या विदेशी झंडे वाले व्यापारिक जहाज पर भारतीय नाविकों के साथ किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है. जहाजों की ट्रैकिंग को लेकर मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक शिप ट्रैकिंग डेटा इस समय निगरानी में मदद कर रहा है, हालांकि इसका दुरुपयोग भी संभव है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अब तक 14 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत लौट चुके हैं. उन्होंने कहा कि फिलहाल 11 भारतीय जहाज अब भी फारसी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं. सरकार उनकी गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में 24 जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहे. इससे एक दिन पहले भी IRGC ने 26 व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित गुजरने की जानकारी दी थी. इससे संकेत मिलता है कि बेहद तनावपूर्ण हालात के बावजूद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही जारी है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट पर संकट लंबा चलता है, तो इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, गैस सप्लाई और महंगाई पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल भारत स्थिति को संभालने में सफल दिख रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है.
अमेरिका-ईरान तनाव अब सिर्फ दो देशों का मुद्दा नहीं रह गया है. इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री परिवहन पर साफ दिखाई देने लगा है. दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यहां की छोटी सी हलचल भी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.
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