
India Pakistan UNHRC: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में अब तक की सबसे तीखी और करारी फटकार लगाई है। आतंकवाद को लेकर हमेशा रोना रोने वाले और खुद को पीड़ित बताने वाले पाकिस्तान के पाखंड की परतें भारत ने पूरी दुनिया के सामने उधेड़ कर रख दी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने बिना किसी झिझक के पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' (Frankenstein State) करार दिया। भारत के इस आक्रामक रुख और बेहद सख्त बयानों ने वैश्विक मंच पर तहलका मचा दिया है, जिससे नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच का कूटनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है।
भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के उस विरोधाभास को बेनकाब किया, जिसे वह सालों से दुनिया के सामने छुपाने की कोशिश कर रहा था। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने सवाल उठाया कि जो देश सरकारी नीति के तहत आतंकवादियों को पालता है, वह खुद को पीड़ित कैसे कह सकता है?
#WATCH | First Secretary at the Permanent Mission of India to the United Nations, Anupama Singh says, "...Decades of military land grabs, demographic engineering and the denial of basic freedoms have brought matters to a point where where even demand for bread, electricity,… pic.twitter.com/eTu09borhE
— DD India (@DDIndialive) June 19, 2026
अनुपमा सिंह ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "यह एक ऐसे 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण है, जो तब हैरान रह जाता है जब उसका अपना ही बनाया राक्षस (आतंकवाद) उसे ही काटने दौड़ता है।" भारत का यह इशारा साफ तौर पर मैरी शेली के मशहूर उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' की तरफ था, जिसमें एक वैज्ञानिक एक ऐसा राक्षस बना देता है जो बाद में खुद उसी के नियंत्रण से बाहर होकर उसी को तबाह कर देता है। भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान ने भारत और दुनिया को नुकसान पहुंचाने के लिए जो आतंकी नेटवर्क तैयार किया था, अब वही नेटवर्क खुद पाकिस्तान की बर्बादी का कारण बन रहा है।
भारत ने UNHRC में पाकिस्तान के ही रक्षा मंत्री के पुराने बयानों को हथियार बनाकर उन पर वार किया। हालांकि सिंह ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस चौंकाने वाले इंटरव्यू की तरफ था जिसने कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं।
🚨 BREAKING: India raises the situation in Pakistan-occupied Kashmir at the UN Human Rights Council.
“Demands for bread were met with bullets and brutality,” Indian diplomat Anupama Singh said, highlighting the killing of protesters in Rawalakot and the worsening conditions in… pic.twitter.com/p5Fx51xz7q— War & Gore (@Goreunit) June 18, 2026
ख्वाजा आसिफ ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक आतंकवादी संगठनों को न सिर्फ पनाह दी, बल्कि उन्हें ट्रेनिंग और भारी-भरकम फंडिंग भी मुहैया कराई। आसिफ ने बेहद शर्मनाक तरीके से कबूला था कि 9/11 के हमलों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के इशारों पर उनके लिए "गंदा काम" (Dirty Work) किया था। भारत ने इसी कबूलनामे को दुनिया के सामने रखते हुए पूछा कि जब इनके खुद के रक्षा मंत्री आतंकवाद को पालने की बात गर्व से स्वीकार करते हैं, तो इनका पीड़ित बनने का नाटक अब और कितने दिन चलेगा?
आतंकवाद के अलावा भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के क्रूर हनन का मुद्दा उठाकर इस्लामाबाद को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। हाल ही में रावलकोट और पूरे पीओके में बढ़ती महंगाई, आटे-चावल की किल्लत और बिजली की आसमान छूती दरों के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी।
| भारत का स्पष्ट रुख (India's Stance) | पाकिस्तान की जमीनी हकीकत (Pakistan's Reality) |
| जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न अंग है। | घरेलू नाकामियों और आर्थिक तंगाली को छिपाने के लिए कश्मीर का राग अलापना। |
| एकमात्र अनसुलझा मुद्दा PoK पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। | रावलकोट जैसी त्रासदियां और दमनकारी नीतियां। |
अनुपमा सिंह ने अंत में पाकिस्तान को अपनी हरकतों से बाज आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर फैलाया जाने वाला झूठ असल में पाकिस्तान की अपनी घरेलू और आर्थिक नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश मात्र है। भारत ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि पाकिस्तान भारतीय इलाकों पर बेबुनियाद दावे ठोकने के बजाय पहले अपने ढहते हुए घर को संभाले। इस महा-टक्कर के बाद अब देखना यह है कि दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका पाकिस्तान वैश्विक बिरादरी को क्या मुंह दिखाता है।
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