
Pakistan Tariff Controversy: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में नया ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है, जिसमें भारत ने अपने निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया। वहीं, पाकिस्तान को अभी भी 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। इस अंतर ने पाकिस्तान में बड़ी हंगामा खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग हैरान हैं कि भारत ने ट्रंप के दबाव के बावजूद बेहतर डील कैसे हासिल कर ली।
पाकिस्तान के नेताओं ने महीनों तक अमेरिका में लॉबिंग की कोशिशें कीं, यहां तक कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने और बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का समर्थन भी किया। बावजूद इसके, उन्हें अपेक्षित फायदा नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने "रणनीतिक स्वायत्तता" के आधार पर बातचीत की, जबकि पाकिस्तान की रणनीति व्यक्तिगत रिश्तों पर आधारित रही।
पाकिस्तान के X यूज़र उमर अली ने ट्रेड डील पर एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने तुलना की कि कैसे ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल के साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे कोई अपनी आत्मा बेचने की कोशिश कर रहा हो। यह पोस्ट और AI-जनरेटेड तस्वीरें इस्लामाबाद में असंतोष और गुस्से को दिखा रही हैं।
विशेषज्ञ और पत्रकार मानते हैं कि भारत ने आर्थिक ताकत और बाज़ार तक पहुँच का फायदा उठाते हुए ट्रेड डील को अपने पक्ष में किया। डिजिटल क्रिएटर वजाहत खान ने लिखा कि ट्रंप ने भारत को "पार्टनर के तौर पर देखा" और 18 प्रतिशत का सौदा दिया। पाकिस्तान की तुलना में भारत ने ज्यादा स्मार्ट और रणनीतिक तरीका अपनाया।
पत्रकारों का मानना है कि पाकिस्तान पर टैरिफ का यह बोझ उसके गिरते निर्यात और कम विदेशी निवेश को और बढ़ा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि देश की मोलभाव करने की शक्ति भी कमजोर हो रही है।
एक सवाल जो सोशल मीडिया और विशेषज्ञ दोनों उठा रहे हैं: "क्या आप इज्जत खरीद सकते हैं?" इस सवाल का जवाब ट्रेड डील की तुलना में ज्यादा गहरा है। भारत ने अपनी रणनीति और आर्थिक समझ से बेहतर डील हासिल की, जबकि पाकिस्तान की कोशिशें सिर्फ दिखावे और व्यक्तिगत रिश्तों तक सीमित रही।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से साफ है कि आर्थिक ताकत और रणनीतिक योजना ही सबसे बड़ा हथियार है। पाकिस्तान के विरोध और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं ने यह भी दिखा दिया कि केवल चापलूसी या लॉबिंग से बड़े फायदे नहीं मिलते। भारत का उदाहरण बताता है कि समझदारी और रणनीति से ही लंबे समय तक फायदा और सम्मान दोनों बनाए रखे जा सकते हैं।
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